इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियों से मंगलवार को 41 लाख रुपए प्राप्त हुए, जिससे दो दिनों में कुल 17 पेटियों से गिनी गई राशि 72 लाख रुपए हो गई है। लगभग साढ़े तीन महीने बाद शुरू हुई गिनती प्रक्रिया में अभी 23 छोटे मंदिरों की दान पेटियां खोली जानी बाकी हैं। पूरी प्रक्रिया में पांच से छह दिन लगने का अनुमान है। जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम और बैंक कर्मचारियों सहित 25 सदस्यीय टीम कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी में गिनती कर रही है। दान पेटियों से नकदी के अतिरिक्त सोने की चेन, चांदी की गणेश प्रतिमा और स्मार्ट वॉच जैसी वस्तुएं भी मिली हैं।
धार की ऐतिहासिक भोजशाला और मौलाना कमाल दरगाह परिसर से जुड़े विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। यह सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ मुस्लिम समाज की पांच याचिकाओं पर आधारित है, जिसमें भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित कर हिंदू पक्ष को नियमित पूजा की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को एक अंतरिम आदेश जारी कर मुस्लिम समाज के लिए जुमे की नमाज हेतु वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था के निर्देश दिए थे, जिसके बाद खसरा नंबर 612 की जमीन पर शांतिपूर्ण ढंग से नमाज अदा की जा रही है।
उज्जैन स्थित कालभैरव मंदिर में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ के मद्देनजर दर्शन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मंदिर प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए वीआईपी गेट के सामने जिगजैग का निर्माण किया है, जिससे होकर प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। आम भक्तों की सुविधा के लिए प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था भी बंद कर दी गई है। वहीं, मंदिर के बाहर पानी की बोतल बेचने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया, जिसमें मारपीट भी हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
भोपाल के लालघाटी स्थित प्रसिद्ध गुफा मंदिर सावन सोमवार के लिए पूरी तरह तैयार है। प्राकृतिक कंदरा में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग का यह पावन धाम मध्य भारत के भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर के पंडित लेखराज शर्मा के अनुसार, महंत नारायणदास त्यागी महाराज ने 1949 में इस गुप्त कंदरा की खोज की थी और 1965 में इसका पुनर्निर्माण कर जन-साधारण के लिए खोला गया। सावन सोमवार पर अलसुबह विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार, आरती और महामृत्युंजय जाप के बाद मंदिर के कपाट खुलेंगे। शाम को भी विशेष अभिषेक और महाआरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन, सुरक्षा, पेयजल और महाप्रसाद के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
इंदौर तहसील के तिल्लौर खुर्द ग्राम के समीप स्थित प्राचीन केवड़ेश्वर महाकाल शिव मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना है और इसे 12-13वीं सदी का माना जाता है। यह मंदिर शिप्रा नदी के उद्गम स्थल के समीप तीन कुंडों के उत्तर-पूर्वाभिमुख स्थित है। इसका शिवलिंग स्वयंभू है और होलकर राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था, जबकि संरचना परमार कालीन है। बाबा दूधाधारी महाराज की तपोस्थली के रूप में विख्यात यह स्थल आध्यात्मिक महत्व रखता है। समीप ही कंपेल और देवगुराड़िया जैसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं।
उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए 10वां नया मार्ग तैयार किया जा रहा है। पुराने महाकाल थाना भवन को तोड़कर प्राचीन महाकाल द्वार से सटाकर बन रहा यह मार्ग हरसिद्धपाल-चौबीसखंभा माता मंदिर मार्ग को सीधे मंदिर से जोड़ेगा। यह मार्ग सामान्य दिनों में आवागमन और भीड़भाड़ वाले अवसरों पर एक्जिट के लिए उपयोग होगा। पिछले एक दशक में मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों की संख्या 5-6 से बढ़कर 10 हो गई है। पर्यटन विभाग के सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल को भी इससे सीधा पहुंच मिलेगी।
धार के ग्राम देवरा में स्थित लगभग 900 वर्ष पुराना परमारकालीन शिव मंदिर पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज होने और 28 अगस्त 2024 को सर्वेक्षण पूरा होने के बावजूद संरक्षण की राह देख रहा है। स्थानीय लोगों को दो साल बाद भी कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है, जिससे मंदिर की सुरक्षा पर चिंता बढ़ रही है। यह मंदिर ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ गहरी धार्मिक आस्था का केंद्र भी है, जहां श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। क्षेत्रवासियों ने मंदिर के वैज्ञानिक संरक्षण और मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की मांग की है।
इंदौर के निकट स्थित प्राशर आश्रम सावन माह में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। यह स्थान धार्मिक आस्था और शिव भक्ति का केंद्र होने के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। हरी-भरी पहाड़ियों से घिरी प्राशर झील और प्राचीन शिव मंदिर यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करते हैं। सावन में यहां विशेष मेले का आयोजन हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन हजारों लोग पहुंच रहे हैं। यह पारिवारिक भ्रमण और पिकनिक के लिए एक उत्तम स्थल है, जो शहर की भागदौड़ से दूर शांत वातावरण प्रदान करता है।
उज्जैन के तीन प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र, कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और महर्षि सांदीपनि आश्रम, सिंहस्थ-2028 से पहले 453.41 करोड़ रुपये की लागत से नए रूप में विकसित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मंदिरों के जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ श्रद्धालु अनुभव को बेहतर बनाना है, जिसमें वेटिंग एरिया, पार्किंग और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। कालभैरव में 164.50 करोड़, मंगलनाथ में 123.90 करोड़ और सांदीपनि आश्रम में 165.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे सिंहस्थ में व्यवस्थित आध्यात्मिक यात्रा सुनिश्चित की जा सके।
धार में भोजशाला विवाद पर मंदिर पक्ष ने मां वाग्देवी की प्रतिमा वापसी के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का उत्सव मनाया। केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार ने ब्रिटिश म्यूजियम को प्रतिमा की वापसी के लिए औपचारिक पत्र लिखा है। इसके साथ ही, महाराज भोज सेवा संस्थान समिति ने भोजशाला परिसर के संरक्षित क्षेत्र के बाहर नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को संभावित है, जिससे भविष्य की नमाज व्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट होगी।