सुरक्षा बल अब नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में सर्च अभियान चला रहे हैं क्योंकि नक्सलियों ने हजारों आईईडी जमीन में दबा रखी हैं। ये आईईडी रिमोट कंट्रोल, प्रेशर और इंफ्रारेड जैसी तकनीकों से संचालित होती हैं और इनमें बैटरियां लगी होती हैं। बरसात में पानी भरने से छत्तीसगढ़ और झारखंड में इन बैटरियों ने काम करना बंद कर दिया है, जिससे आईईडी निष्क्रिय हो गई हैं। हालांकि, नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्रों में भी ये विस्फोटक अभी भी सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। नक्सलियों ने पिछले दो वर्षों में आमने-सामने की लड़ाई से बचने के लिए इन्हें रास्तों पर लगाया था।
झारखंड में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है, जहां एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को धनबाद-गिरिडीह सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसके साथ दो सक्रिय माओवादी सदस्य और दो स्थानीय ग्रामीण भी पकड़े गए हैं। बेसरा झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय था, और उस पर हत्या, पुलिस पर हमले तथा रंगदारी जैसे दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। उसकी गिरफ्तारी को माओवादियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे लाल आतंक की कमर टूटने की उम्मीद है।