भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान लगाए गए 19 फाउंटेन में गड़बड़ियों की दूसरी जांच में भी खामियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में फाउंटेन की मोटर क्षमता और लगाए गए सामान की कीमत की जांच नहीं की गई, जबकि 1.73 करोड़ रुपये के प्राक्कलन तैयार किए गए थे। नगर निगम ने यह रिपोर्ट तीन महीने पहले नगरीय प्रशासन विभाग को भेजी थी, लेकिन यह अभी तक लोकायुक्त तक नहीं पहुंची है। लोकायुक्त ने पहली जांच पर आपत्ति जताई थी, जिसमें आरोपी अधीक्षण यंत्री ने खुद को क्लीनचिट दी थी।
धामनोद नगर परिषद की सीएमओ माया मंडलोई की कार्यप्रणाली को लेकर धरमपुरी विधायक कालू सिंह ठाकुर और केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर के बीच मतभेद का मामला भोपाल पहुंच गया है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने मंगलवार को संबंधित पक्षों से चर्चा की, जिसमें विधायक, मंत्री और धामनोद सीएमओ व नगर परिषद अध्यक्ष शामिल थे। मामला तब गरमाया जब विधायक ठाकुर ने नौ अक्टूबर से भूख हड़ताल की घोषणा की थी, सीएमओ की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए। इसके बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायक ठाकुर को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
भोपाल में आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा गरमाया हुआ है, जिसमें नगर निगम की तीन प्रमुख शाखाओं – भवन अनुज्ञा, राजस्व और श्रम विभाग – की मिलीभगत सामने आई है। नवदुनिया की पड़ताल के अनुसार, राजस्व अधिकारियों ने आवासीय भूखंडों पर नाममात्र शुल्क पर ट्रेड लाइसेंस जारी किए, जबकि गुमास्ता बिना स्थल निरीक्षण के ही बन गए। मुख्यमंत्री के बयान के बाद अरेरा कॉलोनी में व्यापारियों ने दुकानें खोलीं, लेकिन निगम कार्यालय के सामने एक दुकान बंद मिली। भोपालवासी इन अवैध गतिविधियों से आक्रोशित हैं और नेताओं को चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी दे रहे हैं।
जुलाई 2026 में सीएम हेल्पलाइन पर नगरीय निकायों से संबंधित 51,610 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 44,126 का निराकरण नहीं हो सका। राज्य का औसत स्कोर 54.54 रहा, जिससे समग्र प्रदर्शन को ‘डी’ रेटिंग मिली। भोपाल ने सर्वाधिक 6,469 शिकायतें दर्ज कीं, जो कुल शिकायतों का 12.5% थीं। राजधानी में 4,086 शिकायतें लंबित हैं। शिकायत निवारण में भोपाल को दूसरा स्थान मिला, लेकिन मूलभूत सुविधाओं, विशेषकर साफ-सफाई और सीवेज को लेकर असंतुष्टि बनी हुई है।