मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता से जुड़ी जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट ने सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार के गुमराह करने के प्रयास पर टिप्पणी की। न्यायालय ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए एक अधिवक्ता की अध्यक्षता में तकनीकी टीम सहित कमीशन गठित करने का भी संकेत दिया।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शहर की बदहाल सड़कों पर सख्त रुख अपनाया है। कुलदीप नर्सरी से एजी ऑफिस पुल तक की जर्जर सड़क से जुड़ी जनहित याचिका का दायरा अब पूरे शहर की सड़कों तक बढ़ा दिया गया है। बुधवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने नगर निगम से पूछा कि कितनी सड़कें सुरक्षित हैं और उसे सोमवार तक पूरे शहर की सड़कों की मौजूदा स्थिति और वाहन संचालन के लिए उपयुक्त सड़कों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि सड़कों का रखरखाव किस विभाग या एजेंसी की जिम्मेदारी है।