ग्वालियर में नवविवाहिता सपना गुर्जर ने शादी के तीन दिन बाद ससुराल में फांसी लगा ली थी। 102 दिन तक अस्पताल में चले इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। महाराजपुरा पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर हत्या, दहेज मांगने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शादी वाले दिन ही दहेज की मांग की गई थी और सपना के शरीर पर चोट के निशान भी थे। पुलिस जांच के बाद आत्महत्या के कारणों और आगामी कार्रवाई का निर्धारण होगा।
रतलाम जिले में 23 वर्षीय नवविवाहिता संध्या कुमारी की संदिग्ध मौत ने दलालों के माध्यम से होने वाले अंतरराज्यीय विवाहों के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में विवाह के लिए 2.60 लाख रुपये के भुगतान और बिचौलियों की भूमिका उजागर हुई है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र में ऐसे विवाहों का चलन बढ़ा है, जहाँ दुल्हनें अक्सर शादी के कुछ समय बाद ही घर छोड़कर चली जाती हैं। शासकीय अधिवक्ता संजीव सिंह चौहान ने ऐसे मामलों में मानव तस्करी के पहलुओं की जांच की आवश्यकता पर बल दिया है। रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल ने दलालों के खिलाफ कार्रवाई और अंतरराज्यीय पुलिस सहयोग की बात कही है।
सतना जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र के धमना गांव में शुक्रवार दोपहर 22 वर्षीय नवविवाहिता लक्ष्मी विश्वकर्मा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। लक्ष्मी अपने मायके में अकेली थीं जब परिवार के सदस्य खेत पर गए थे। परिजनों के लौटने पर उनका शव फंदे पर लटका मिला। सूचना पर पहुंची अमरपाटन पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम किया और जांच शुरू कर दी है। मृतका की शादी इसी वर्ष 5 मई को हुई थी। आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है, पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है।
रतलाम में एक नवविवाहिता संध्या कुमारी की मकान की तीसरी मंजिल से रस्सी के सहारे उतरने के प्रयास में गिरने से मौत हो गई। 23 वर्षीय संध्या, जो बिहार से विवाह कर रतलाम लाई गई थीं, की शादी 10-12 दिन पहले 45 वर्षीय मुकेश कुमार चौहान से हुई थी। जांच में विवाह की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है, क्योंकि पति ने दलाल को 2.60 लाख रुपये देकर शादी की थी। पुलिस फर्जी विवाह गिरोह की भूमिका की जांच कर रही है।
इंदौर में एक नवविवाहित जोड़े का विवाह मात्र सात दिन में समाप्त हो गया। पत्नी ने विवाह को अपनी मर्जी के खिलाफ बताते हुए पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिला न्यायालय में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत एक वर्ष तक अलग रहने की शर्त पर याचिका की सुनवाई योग्यता का सवाल उठा। पत्नी की बातें सुनने के बाद पति ने तलाक का फैसला किया, जिस पर पत्नी भी सहमत थी। न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए सात दिनों के भीतर ही तलाक को मंजूरी दे दी।