नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने ‘अनम्यूट भारत’ पॉडकास्ट में विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और तकनीक का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यदि एक लाख करोड़ रुपये के शोध, विकास और नवाचार कोष का सही उपयोग होता है, तो अगले दस वर्षों में भारत से तकनीक के क्षेत्र में कम से कम दस बड़ी कंपनियां उभर सकती हैं। यह भारत को तकनीक का उपभोक्ता से निर्माता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा और एलन मस्क या स्टीव जॉब्स जैसी प्रतिभाओं को जन्म देगा। प्रो. करंदीकर ने सूचना युद्ध के खतरों और स्वदेशी तकनीक के विकास पर भी प्रकाश डाला।
उज्जैन में आयोजित ‘भारतीय दृष्टि में Gen Z’ व्याख्यान में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने विकसित भारत के लिए Gen Z को भारतीय संस्कारों और नवाचार का संगम अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और एआई के युग में युवाओं को अपनी आधुनिक सोच भारतीय मूल्यों से जोड़नी होगी। स्वामी जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और डिजिटल युग में जिम्मेदारी बरतने की सलाह दी। रोहित कुमार सिंह ने युवा ऊर्जा को राष्ट्रहित में लगाने का आह्वान किया।
नीति आयोग की पहली इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 में मध्य प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश देश में सातवें और बड़े राज्यों में पांचवें स्थान पर है। हालांकि, रिपोर्ट ने नवाचार और पेटेंट आधारित अर्थव्यवस्था को अगली सबसे बड़ी चुनौती बताया है। राज्य में स्टार्टअप की संख्या 2021 में 540 से बढ़कर 2023 में 1,264 हो गई है, लेकिन प्रति लाख आबादी पर इनक्यूबेटर और पेटेंट आवेदन बड़े राज्यों के औसत से काफी कम हैं। वर्ष 2025 में 1,346 पेटेंट आवेदन के साथ मध्य प्रदेश अन्य प्रमुख राज्यों से पीछे है।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय द्वारा विकसित शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के संगम पर एक नवाचार को भारत सरकार ने मान्यता दी है। डॉ. देव रस पाण्डेय के नेतृत्व में तैयार यह एआई आधारित डिवाइस विद्यार्थियों की सीखने की गति, रुचि और कमजोरियों का विश्लेषण कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप अध्ययन सामग्री व मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।