सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने एनएलआईयू भोपाल में नागरिक स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने वाराणसी इफ्तार पार्टी प्रकरण का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि गंगा में बिरयानी खाना अपराध नहीं है तो युवाओं को तीन महीने जेल में क्यों रखा गया। उन्होंने कहा कि कानून का उपयोग नागरिकों की स्वतंत्रता सीमित करने के लिए नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति भुइयां ने न्यायपालिका में जनविश्वास, न्यायिक निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आधारशिला बताया। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के दायरे के सिमटने पर चिंता व्यक्त की और इसे संवैधानिक अधिकार बताया।