इंदौर में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर की ऑनलाइन मैपिंग में गड़बड़ी के कारण संपत्ति रजिस्ट्रियां प्रभावित हो रही हैं। कई कॉलोनियों की लोकेशन गलत दर्ज होने से गाइडलाइन दरें बदल रही हैं और दस्तावेज सत्यापन पूरा नहीं हो पा रहा है। यह समस्या संपदा 2.0 की शुरुआत से पहले जल्दबाजी में की गई मैपिंग का परिणाम है। संपत्ति खरीदार सुधार के लिए पंजीयन कार्यालय पहुंच रहे हैं। तकनीकी सुधार के लिए आवेदनों को भोपाल भेजा जाता है, जिसमें चार से पांच दिन लगते हैं, जिससे रजिस्ट्री कार्य बाधित होता है। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश स्थानों पर सुधार कर दिया गया है।
इंदौर की मूसाखेड़ी क्षेत्र स्थित अजय बाग कॉलोनी के निवासी पिछले दो माह से दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। नर्मदा जल आपूर्ति के दौरान नलों से काला और बदबूदार पानी आता है, जिससे सीवेज जैसी दुर्गंध आती है। रहवासियों को बीमारियों का खतरा है और कई लोग बीमार भी हो चुके हैं। पीने के पानी के लिए उन्हें बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है। सीएम हेल्पलाइन और नगर निगम के 311 एप पर शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन आरोप है कि उनका समाधान किए बिना ही निराकरण दिखा दिया गया। रहवासी पुरानी पाइपलाइन में सीवरेज के पानी के मिश्रण की आशंका जता रहे हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।