एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने एमडीआर-टीबी के लिए एक नया जीनोटाइप एमटीबीडीआरएसएल टेस्ट विकसित किया है, जो दवा प्रतिरोध का पता सिर्फ दो दिन में लगा सकता है। पहले इसमें 4-6 सप्ताह लगते थे, जिससे अनुमान के आधार पर उपचार शुरू करने का जोखिम रहता था। इस टेस्ट से मरीजों को सही दवा के साथ जल्द इलाज मिल पाएगा। अध्ययन में 74 एमडीआर-टीबी मरीजों पर यह परीक्षण किया गया, जिसमें 19% में फ्लोरोक्विनोलोन दवा के प्रति प्रतिरोध पाया गया, जिसका कारण टीबी के कीटाणु के जीआर-ए जीन में बदलाव था। डॉ. आनंद कुमार मौर्य ने इस टेस्ट को सरकारी टीबी कार्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है, जिससे गरीब मरीजों को भी लाभ मिल सके।
जबलपुर के विक्टोरिया जिला अस्पताल में सोमवार से अत्याधुनिक एमआरआई सेंटर शुरू हो गया है, जिससे मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की तुलना में लगभग आधी कीमत पर जांच सुविधा मिलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। कृष्णा डायग्नोसिस के साथ 13 वर्ष का अनुबंध हुआ है, जो 7.5 करोड़ रुपये की लागत से 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित करेगा। आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों के लिए यह सुविधा नि:शुल्क होगी, जबकि अन्य मरीजों के लिए शुल्क 1340 से 3500 रुपये तक होगा।