मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने दिवंगत कर्मचारियों के 160 आश्रितों को नियमित नियुक्ति प्रदान की है, जिन्हें पहले अनुकंपा आधार पर संविदा पदों पर नियुक्त किया गया था। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे कर्मचारी कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। नियमित होने वालों में 159 कार्यालय सहायक श्रेणी-3 प्रशिक्षु और एक लाइन परिचारक प्रशिक्षु शामिल हैं। यह नियुक्ति कंपनी की अनुकंपा नियुक्ति नीति-2018 और संशोधित नीति-2023 के तहत हुई है। इससे पहले, मध्यप्रदेश ट्रांसमिशन कंपनी ने भी 43 अनुकंपा संविदा कर्मियों को नियमित किया था।
जबलपुर हाई कोर्ट ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के नियमितीकरण को निलंबित करने के कुलगुरु के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा कि अनियमितता का ठोस आधार नहीं है और 14 जुलाई, 2026 का आदेश जांच रिपोर्ट आने तक प्रभावी नहीं रहेगा। कर्मचारियों को अंडरटेकिंग देनी होगी कि प्रतिकूल रिपोर्ट आने पर वे अंतर राशि लौटाएंगे। अगली सुनवाई सितंबर में होगी। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोफेसर डॉ. सोमपाल सिंह द्वारा दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. सिंह को नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव का सामना करना पड़ा है। डॉ. सिंह ने 1993 में एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उन्हें 2008 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि एमपीपीएससी अनुत्तीर्ण एक अन्य प्रोफेसर को 2006 से पदोन्नति मिली। अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, और याचिका में उच्च शिक्षा विभाग तथा एमपीपीएससी के सचिव सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।