एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, इंदौर में रात के तापमान में बदलाव के कारण लोगों की नींद में सालाना 69 घंटे तक की कमी आई है। यह अध्ययन क्लाइमेट सेंट्रल द्वारा दुनिया के 1335 शहरों में किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के पांच शहर शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और तपती रातें नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं। 1970 के बाद से जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से बढ़ा है, और नींद खराब होने के घंटों में दो से तीन गुना वृद्धि देखी गई है।