कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया है। संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि बिहार और असम के बाद अब राजस्थान में भी किसी तरह की कार्रवाई न करने की गारंटी मिली है। दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों से हुई एक बैठक में यह भरोसा दिलाया गया। सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने की अपील की है और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक वेबसाइट शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक करोड़ रुपये की सहायता दी है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि वादे पूरे नहीं हुए तो वे फिर से आंदोलन करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट नीट परीक्षा को ऑनलाइन कराने पर केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स के सुझावों का इंतजार कर रहा है। कोर्ट ने ऑनलाइन प्रणाली के लिए साइबर सुरक्षा और डेटाबेस सुरक्षा जैसे अतिरिक्त इंतजामों की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सुनवाई RJD सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर हुई, जो 3 मई की नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के बाद रद्द होने और दोबारा परीक्षा से संबंधित है। केंद्र सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित उच्च स्तरीय समिति में नंदन नीलेकणि, एस. सोमनाथ, तपन डेका सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
असम सरकार ने नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़े सभी आपराधिक मामले वापस लेने का बड़ा फैसला किया है। राज्य के गृह एवं राजनीतिक विभाग के आदेशानुसार, गिरफ्तार 13 लोगों की रिहाई की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। 26 जुलाई तक राज्य में ऐसे पांच मामले दर्ज किए गए थे। सरकार ने यह निर्णय विरोध प्रदर्शनों की परिस्थितियों की समीक्षा, जवाबदेही मजबूत करने और उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस मामले को अब बंद माना जाएगा।
इंदौर में नीट यूजी पेपर लीक मामले को लेकर भंवरकुआं चौराहे पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। युवा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने इस प्रदर्शन को बिना अनुमति बताया है और वीडियोग्राफी के साथ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी बीच, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजुकेशन के एमएड छात्रों ने असिस्टेंट प्रोफेसर पर कक्षा न लेने और अधूरा पाठ्यक्रम होने के बावजूद परीक्षा का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। छात्रों ने कुलगुरु और कुलसचिव से शिकायत की है, जिसके बाद विभागाध्यक्ष ने शिक्षकों को नोटिस देने की बात कही।