अभिनेत्री नीना गुप्ता ने ‘डायलॉग ऑन मेंटल वेलनेस’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि ‘बेटी पढ़ाओ’ से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाना होगा, क्योंकि देश के 98% घरों में आज भी घूंघट है और लड़कियों की सोच नहीं बदली है। उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘सच कहूं तो’ के लेखन अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि कोविड काल में परिवारजनों के निधन के बाद ही वह किताब पूरी कर पाईं। गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य, बच्चों के पालन-पोषण, करियर और आज की भ्रमित युवा पीढ़ी पर भी अपने विचार रखे, जिसमें उन्होंने कहा कि अनुभव से ही जीवन जीना सीखा जाता है।