इंदौर उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है, तो एमटीपी एक्ट की निर्धारित शर्तों के तहत डॉक्टर और अस्पताल कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश एक नाबालिग पीड़िता की याचिका पर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य कमिश्नर को राज्य के सभी अस्पतालों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने जबलपुर उच्च न्यायालय के 2025 के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय पर्याप्त मानी गई थी।
ग्वालियर में विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया की अदालत में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र कुमार स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस वर्दी पहनकर उपस्थित हुए। अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें सिविल ड्रेस में दोबारा आने का आदेश दिया और शाम तक न्यायालय में खड़ा रखा। न्यायाधीश ने पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर थाना प्रभारी की बिना वर्दी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा था। यह मामला थाने के मालखाने से जब्त देशी कट्टे के गायब होने से जुड़ा है, जिसे पुलिस अदालत में पेश नहीं कर सकी थी, जिसके कारण थाना प्रभारी को गंभीर लापरवाही मानते हुए तलब किया गया था।
हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि विवादित वसीयत के आधार पर राजस्व अधिकारी भूमि का नामांतरण नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने बैतूल के एक मामले में यह आदेश दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने 1989 की कथित वसीयत पर नामांतरण का दावा किया था। प्रतिवादियों ने वसीयत को फर्जी बताते हुए चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत की वैधता पर विवाद होने पर पक्षकारों को अपने अधिकारों की घोषणा के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा, क्योंकि राजस्व अधिकारियों को ऐसे मामलों में फैसला करने का अधिकार नहीं है। बोर्ड आफ रेवेन्यू द्वारा पूर्व में पारित नामांतरण आदेशों को निरस्त करना उचित था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्वर्णरेखा नदी के प्रदूषण और पुनर्जीवन पर दायर जनहित याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए गए कदमों, भविष्य की योजनाओं और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से नदी में कचरा डालने वाले स्रोतों और धरातल पर की गई कार्रवाई के बारे में भी पूछा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 को होगी।