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अचलेश्वर महादेव ट्रस्ट चुनाव में प्रशासन की ढिलाई, हाई कोर्ट की दो माह की समयसीमा समाप्त

ग्वालियर में अचलेश्वर महादेव ट्रस्ट के चुनाव की घोषणा में प्रशासन की ढिलाई सामने आई है। उच्च न्यायालय ने दो माह के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया था, जिसकी समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है। न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने न्यास के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जिला न्यायालय के 2022 के आदेश को निरस्त कर दिया था और छह माह में प्रकरण का निराकरण करने को कहा था। सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह राठौर की शिकायत पर जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले थे। न्यास की कार्यकारिणी का कार्यकाल 2019 में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन नई कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है।

ग्वालियर हाई कोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर मांगा जवाब, पूर्व सिटी प्लानर के आपराधिक ट्रायल की प्रति भी तलब

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता से जुड़ी जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट ने सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार के गुमराह करने के प्रयास पर टिप्पणी की। न्यायालय ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए एक अधिवक्ता की अध्यक्षता में तकनीकी टीम सहित कमीशन गठित करने का भी संकेत दिया।

ग्वालियर में विद्या विहार के 60 से अधिक सर्वे नंबरों पर रजिस्ट्री और निर्माण पर रोक

ग्वालियर में विद्या विहार कॉलोनी के 60 से अधिक सर्वे नंबरों पर रजिस्ट्री और निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद गुपचुप रजिस्ट्री और अवैध निर्माण की शिकायतों के बाद की गई है। झाँसी रोड एसडीएम अतुल सिंह ने जिला पंजीयक, पंजीयन विभाग और नगर निगम को पत्र जारी कर उच्च न्यायालय के आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला मध्य प्रदेश शासन बनाम नारायणी देवी व अन्य से संबंधित है, जिसमें उच्च न्यायालय ने 15 मार्च 2019 को शासन के पक्ष में स्थगन आदेश जारी किया था।

कलेक्टर-एसएसपी ने बिलौआ की प्रतिबंधित खदानों का निरीक्षण किया, निगरानी के लिए 8 चेकिंग पॉइंट और विशेष जांच दल तैनात

कलेक्टर रुचिका चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने हाईकोर्ट के प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए डबरा अनुभाग के बिलौआ क्षेत्र में प्रतिबंधित खदानों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को अवैध उत्खनन और खनिज परिवहन रोकने के लिए कड़ाई से निर्देश दिए। एसएसपी ने 8 चेकिंग पॉइंट स्थापित किए हैं, जबकि जिला प्रशासन ने 24 घंटे निगरानी के लिए विशेष जांच दल (फ्लाइंग स्क्वाड) गठित किए हैं। कलेक्टर ने निगरानी में किसी भी लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

सरकारी वसूली में कानून और प्रक्रिया आवश्यक: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंडला सरपंच-सचिव की 4.93 लाख की वसूली पर रोक लगाई

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि सरकारी वसूली में कानून और प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। कोर्ट ने मंडला जिले की ग्राम पंचायत बिनैका की सरपंच अनुसुइया परस्ते और पंचायत सचिव विपिन पटेल के खिलाफ प्रस्तावित 4.93 लाख रुपये की वसूली पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं ने 29 जून 2026 के वसूली आदेश को चुनौती दी थी, जिसे उन्होंने विधि सम्मत नहीं बताया। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने राज्य शासन सहित संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है और स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक कोई वसूली नहीं होगी।

संविदा महिला कर्मी को बाल देखभाल छुट्टी नहीं देने पर राज्य शिक्षा केंद्र निदेशक पर 50 हजार का जुर्माना

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी को बाल देखभाल छुट्टी (CCL) से वंचित करने पर राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने छुट्टी का आवेदन खारिज करने वाले विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम, 1977 के तहत संविदा महिला कर्मचारी भी दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिन की छुट्टी की हकदार हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकते। याचिकाकर्ता आयशा शेख नौवीं बार कोर्ट पहुंची थीं।

संगीत शिक्षक भर्ती: हाई कोर्ट ने डीपीआई अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया

जबलपुर हाई कोर्ट ने संगीत शिक्षक भर्ती-2024 से संबंधित अंतरिम आदेशों का पालन न करने पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी किया है। इस मामले में डीपीआई अधिकारी कामना आचार्य का नाम सामने आया है। न्यायालय ने ‘प्रभाकर’ सहित समकक्ष योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को विकल्प भरने की अनुमति देने के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप है कि डीपीआई ने इन आदेशों का पूर्ण पालन नहीं किया। हाई कोर्ट ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

भरण-पोषण तय करने से पहले पति-पत्नी की आय का पूर्ण आकलन अनिवार्य: MP हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि भरण-पोषण मामलों में पति-पत्नी की वास्तविक आय, संपत्ति, खर्च और वित्तीय दायित्वों का पूर्ण आकलन किए बिना मेंटेनेंस तय नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने दमोह फैमिली कोर्ट के 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के आदेश को निरस्त कर मामला पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। कोर्ट ने प्रदेश की सभी फैमिली कोर्टों को निर्देश दिए कि भविष्य में प्रत्येक भरण-पोषण आदेश में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए।

ऑक्सीटोसिन दुरुपयोग पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

ग्वालियर हाई कोर्ट ने फल, सब्जियों और पोल्ट्री उत्पादों में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के कथित दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख सचिव से पूछा है कि इस दुरुपयोग को रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और विस्तृत जवाब मांगा है। यह मामला 2013 के एक जनहित याचिका के निर्देशों का पालन न होने से संबंधित अवमानना याचिका से उभरा है, जिसमें ऑक्सीटोसिन की खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने और केवल चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर बिक्री का आदेश दिया गया था। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

इंदौर हाई कोर्ट लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण पर सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब

मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर से हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को असंतोषजनक बताया और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। याचिकाकर्ता अमिताभ उपाध्याय ने धार्मिक स्थलों और वाहनों में तेज आवाज से हो रहे शोर पर शिकायत की थी। कोर्ट ने 2024 के अपने पूर्व निर्देशों के पालन में रिपोर्ट न मिलने पर नाराजगी जताई। अधिकारियों की पेशी के बाद कोर्ट ने उनसे विशिष्ट कार्रवाई का ब्योरा मांगा।