नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों वाली संपत्तियों की पहचान और कार्रवाई के संबंध में विरोधाभासी आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। पहले 62 हजार से अधिक संपत्तियों को चिह्नित करने का दावा किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत शपथपत्र में केवल 7,951 मामलों में नोटिस जारी करने की जानकारी दी गई। निगम ने 190 परिसरों को बंद और सील करने की बात कही, जबकि वास्तव में केवल 7 प्रतिष्ठान सील किए गए थे। अवैध निर्माण के 296 मामले भी चिह्नित किए गए हैं।
मुरैना में जिला न्यायालय के आधा दर्जन न्यायाधीशों द्वारा चार घंटे तक चली मजिस्ट्रेट चेकिंग में नगर निगम के सभापति सहित 24 वाहनों पर कार्रवाई की गई, जिससे 80 हजार रुपये का राजस्व वसूला गया। सभापति राधारमण डंडौतिया की फॉर्च्यूनर गाड़ी पर अवैध हूटर और काली फिल्म पाई गई, जिस पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाकर हूटर व फिल्म हटाई गई। इस कार्रवाई के दौरान सड़कों पर वाहनों में हड़कंप मच गया और कई वाहन चालक उल्टे लौट गए, जबकि ई-रिक्शे एमएस रोड से गायब हो गए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा क्षेत्र में अवैध खनन के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए खनन कारोबारी अशोक सिंह यादव की जाफरपुर स्थित तीसरी खदान को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया है। अदालत ने इस अवधि में ब्लास्टिंग, खनन और पहले से निकाले गए खनिज के परिवहन पर रोक लगाई है। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड प्रस्तुति पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि मूल रिकॉर्ड छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी, जिसमें अवैध खनन पर नियंत्रण के कदमों पर विचार किया जाएगा। अदालत ने कलेक्टर को तत्काल ड्रोन वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए।
ग्वालियर में विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया की अदालत में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र कुमार स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस वर्दी पहनकर उपस्थित हुए। अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें सिविल ड्रेस में दोबारा आने का आदेश दिया और शाम तक न्यायालय में खड़ा रखा। न्यायाधीश ने पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर थाना प्रभारी की बिना वर्दी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा था। यह मामला थाने के मालखाने से जब्त देशी कट्टे के गायब होने से जुड़ा है, जिसे पुलिस अदालत में पेश नहीं कर सकी थी, जिसके कारण थाना प्रभारी को गंभीर लापरवाही मानते हुए तलब किया गया था।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की पिटाई के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायालय ने जिला प्रशासन को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट संभवतः 3 अगस्त को कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। यह वृद्धाश्रम महाराणा प्रताप नगर में निगम के आंगनवाड़ी कमरों में चार साल से अवैध रूप से संचालित हो रहा था। एक वायरल वीडियो में नाबालिग द्वारा बुजुर्गों की पिटाई सामने आने के बाद प्रशासन ने आश्रम को सील कर दिया था और 31 बुजुर्गों को अन्य आश्रमों में स्थानांतरित किया था।