पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसके कारण अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति पर अनिश्चितता बनी हुई है। हाई कोर्ट जबलपुर ने पदोन्नति नियम-2002 को निरस्त किया था, जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और यह मामला अभी विचाराधीन है। मई 2016 से पदोन्नतियां बंद थीं, जिसके बाद सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत उच्च पद का प्रभार दिया। नए पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद जून से लगभग 60 हजार पदोन्नतियां हुई हैं, हालांकि हाई कोर्ट में इन नियमों पर सुनवाई जारी है। हाई कोर्ट ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के शीघ्र निराकरण के लिए प्रयास करने को कहा है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोफेसर डॉ. सोमपाल सिंह द्वारा दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. सिंह को नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव का सामना करना पड़ा है। डॉ. सिंह ने 1993 में एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उन्हें 2008 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि एमपीपीएससी अनुत्तीर्ण एक अन्य प्रोफेसर को 2006 से पदोन्नति मिली। अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, और याचिका में उच्च शिक्षा विभाग तथा एमपीपीएससी के सचिव सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।