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भोपाल जिला अदालत में 46 जजों के पद खाली, 1.50 लाख मामले लंबित

भोपाल जिला अदालत में 46 जजों के पद खाली होने के कारण न्याय की गति धीमी पड़ गई है, जिससे लगभग 1.50 लाख मामले लंबित हैं। स्वीकृत 112 पदों में से केवल 66 जज ही कार्यरत हैं, जिसके चलते प्रत्येक अदालत पर 4 से 6 हजार मामलों का बोझ है। 20% से अधिक मामले 5 से 10 साल पुराने हैं। नए जजों के लिए पर्याप्त कोर्टरूम नहीं हैं; 10 कोर्टरूम को विधिक सेवा प्राधिकरण भवन में स्थानांतरित करना पड़ा है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पुरानी जेल की जमीन पर प्रस्तावित नई मल्टी-स्टोरी अदालत भवन परियोजना भी हाउसिंग बोर्ड के प्रस्ताव और जेल विभाग की कैदी शिफ्टिंग के कारण अटकी हुई है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 4.90 लाख मुकदमे लंबित, 11 न्यायाधीश पद खाली

मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में 8 और 9 अगस्त को इंदौर में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के 50 से अधिक न्यायाधीश न्याय व्यवस्था की चुनौतियों पर मंथन कर रहे हैं। 16 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग 4.90 लाख मुकदमे लंबित हैं, जिनमें 24,938 मामले 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। हाई कोर्ट में 53 स्वीकृत न्यायाधीश पदों में से लगभग 11 पद खाली हैं। सम्मेलन में तकनीक और सुधारों के साथ-साथ न्यायाधीशों की कमी और लंबित मामलों के वास्तविक अनुपात पर विचार की उम्मीद है ताकि न्यायपालिका को आधुनिक और पर्याप्त बनाया जा सके।

हाई कोर्ट में नई व्यवस्था: वादपत्र, याचिकाएं, शपथ पत्र अब दोनों ओर होंगे प्रिंट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पेपरलेस कार्यप्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब सभी न्यायिक दस्तावेज, जैसे वादपत्र, याचिकाएं और शपथ पत्र, ए-4 आकार के कागज पर दोनों ओर प्रिंट किए जाएंगे। वकीलों को नोटिस और अन्य सूचनाएं पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस या व्हाट्सएप अलर्ट के माध्यम से मिलेंगी, जिससे हार्ड कॉपी पत्राचार समाप्त हो जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, कागज की खपत कम करना और न्यायिक कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर सहित चार शहरों में स्थाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर सहित चार शहरों में नए स्थाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की है, जिससे न्यायिक व्यवस्था में नई उम्मीद जगी है। वर्तमान में इंदौर में कोई स्थाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं है, जिससे शिक्षा और रोजगार से संबंधित मामले लंबे समय तक लंबित रहते हैं। इस पहल से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा संभव होगा। इंदौर जिला न्यायालय में पहले से 82 कोर्ट संचालित हैं। लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर के अनुसार, यह व्यवस्था पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने में सहायक होगी।