सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की कावेरी जल विवाद से संबंधित याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की जांच संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपलब्धता के कारण टालने के अनुरोध को भी कोर्ट ने स्वीकार किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) की उस याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए स्थगित कर दी, जिसमें उसके छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी को चुनौती दी गई है।
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका के कारण हाई कोर्ट में आगे नहीं बढ़ सका। सोमवार को करीब एक घंटे की बहस के बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही रिट अपील पर सुनवाई उचित होगी। दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी की जल्द सुनवाई के लिए संयुक्त आवेदन देंगे। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अपने पुराने जुड़ाव का खुलासा किया, जिस पर किसी पक्ष को आपत्ति नहीं थी।
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई में 50% आरक्षण सीमा पर बहस ने नया मोड़ लिया। ओबीसी पक्ष ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पहले लागू होने का हवाला देते हुए 50% सीमा पार करने के लिए केवल ओबीसी आरक्षण को जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति जताई। सरकार की दलीलों, विशेषकर पुराने आंकड़ों के उपयोग और नए डेटा की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 87-13% भर्ती फार्मूले पर सुनवाई 27% ओबीसी आरक्षण की वैधता पर बहस पूरी होने के बाद होगी। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को दोपहर 2.30 बजे निर्धारित है।
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई आज निर्धारित थी, लेकिन न्यायमूर्ति विनय सराफ की अनुपलब्धता के कारण अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी। पिछली सुनवाई में, प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया था कि 51% आबादी के बावजूद उन्हें लंबे समय तक केवल 14% आरक्षण मिला, जबकि अन्य वर्गों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिक आरक्षण प्राप्त है। सरकार अभी तक आरक्षण के आधार को स्पष्ट नहीं कर पाई है।
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने मॉडल त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जमानत मांगी है। मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन दो न्यायाधीशों ने पारिवारिक संबंधों का हवाला देते हुए खुद को इससे अलग कर लिया। मामला तीसरे न्यायालय को भेजा गया, जहां नियमित मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। गिरिबाला सिंह ने स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी 100 वर्षीय मां की देखभाल और घर की चोरी के बाद संपत्ति की देखरेख के लिए जेल से बाहर रहने की आवश्यकता बताई है।