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त्विषा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला और बेटे समर्थ पर उसी अदालत में चलेगा केस जिसने दी थी अग्रिम जमानत

भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला एवं सत्र प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। इसी अदालत से गिरिबाला सिंह को पहले अग्रिम जमानत मिली थी, जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। सीबीआई ने 17 अगस्त को दोनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप पत्र दाखिल किया है। 16 सितंबर 2026 को आरोप तय करने पर सुनवाई होगी। परिजनों ने निष्पक्ष सुनवाई के लिए केस को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है।

भोपाल में नई न्याय संहिताओं पर प्रदर्शनी, अपराध से फैसले तक की प्रक्रिया 14 जोन में प्रदर्शित

भोपाल के भेल दशहरा मैदान में नई न्याय संहिताओं पर आधारित एक पांच दिवसीय प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 अक्टूबर को किया। यह प्रदर्शनी 7 अक्टूबर तक चलेगी और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय न्याय व्यवस्था में हुए बदलावों को आम लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाना है। इसमें अपराध की सूचना से लेकर कोर्ट के अंतिम फैसले तक की पूरी प्रक्रिया को 14 जोन में मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो और लाइव प्रदर्शन के माध्यम से समझाया जा रहा है। सजीव नाट्य मंचन इसका प्रमुख आकर्षण है, जहाँ पुलिस अधिकारी और कलाकार पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन करते हैं।

शहडोल में युवती की आत्महत्या: परिजनों के विरोध प्रदर्शन के बाद युवक पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज

शहडोल के ब्यौहारी थाना क्षेत्र के एक गांव में युवती की आत्महत्या के बाद तनाव फैल गया। आक्रोशित परिजनों ने गांव के एक युवक पर आरोप लगाते हुए युवती के शव को सड़क पर रखकर दो घंटे तक चक्का जाम किया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की और उन्हें शांत कराकर जाम खुलवाया। समझाइश के बाद पुलिस ने मर्ग जांच, घटनास्थल के तथ्यों और परिजनों के बयानों के आधार पर संबंधित युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

मध्य प्रदेश में दुष्कर्म के 10-15% मामलों में पुलिस द्वारा गलत धाराएं लगाई जा रहीं

मध्य प्रदेश में दुष्कर्म के लगभग 10 से 15 प्रतिशत मामलों में पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं का गलत प्रयोग किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की एक समीक्षा टीम ने अपनी दैनिक जांच में इस लापरवाही का खुलासा किया है। पोक्सो मामलों में आयु के अनुरूप धाराएं न लगाना, शादी के झांसे से जुड़े मामलों में गलत धाराएं, मानसिक विक्षिप्त और गर्भवती नाबालिग पीड़ितों से संबंधित धाराओं का समावेश न करना जैसी प्रमुख गलतियां सामने आई हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान सुधार किए जा रहे हैं और पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।