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भोपाल नगर निगम: 13 सहायक यंत्री पदोन्नति के बाद बिना काम, छह को तीन माह से नहीं मिली जिम्मेदारी

भोपाल नगर निगम में इंजीनियरों की पदस्थापना को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। एक ओर 13 पदोन्नत सहायक यंत्री बिना काम बैठे हैं, जिनमें से छह को तीन महीने से कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। दूसरी ओर, निगम के कई जोन और महत्वपूर्ण शाखाएं इंजीनियरों की कमी से जूझ रही हैं, और 48 उपयंत्री सहायक यंत्री का प्रभार संभाल रहे हैं। निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि पदस्थापना प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।

राजस्व निरीक्षकों ने नायब तहसीलदार के रिक्त पदों पर पदोन्नति की मांग की

मध्य प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ, जिला भोपाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को पत्र लिखकर नायब तहसीलदार के रिक्त पदों पर राजस्व निरीक्षकों को पदोन्नति देने की मांग की है। संघ का कहना है कि इस अवसर से राजस्व निरीक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासन पर वित्तीय भार भी कम होगा। पत्र में बताया गया है कि नायब तहसीलदार के स्वीकृत पदों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जबकि राजस्व निरीक्षक संवर्ग में पर्याप्त कर्मचारी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव: छिंदवाड़ा में 1281 अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा में 1281 अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की गई है और शेष अधिकारियों को सितंबर-अक्टूबर तक पदोन्नति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनकल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विभिन्न विभागों में नई भर्तियों की जानकारी दी, जिनमें पुलिस में 18,000 से अधिक और शिक्षकों के 10,000 से अधिक पद शामिल हैं। डॉ.

मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण नीति बनाने की सिफारिश

मध्य प्रदेश में दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए एक नीति बनाने की सिफारिश की है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र भेजा है, जिसमें 2023 की पूर्व अनुशंसा का पालन न होने और राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में लागू नीतियों का उल्लेख किया गया है। यह अनुशंसा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 34 के प्रावधानों पर आधारित है।

पदोन्नति में आरक्षण नियम निरस्ती को सरकार की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसके कारण अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति पर अनिश्चितता बनी हुई है। हाई कोर्ट जबलपुर ने पदोन्नति नियम-2002 को निरस्त किया था, जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और यह मामला अभी विचाराधीन है। मई 2016 से पदोन्नतियां बंद थीं, जिसके बाद सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत उच्च पद का प्रभार दिया। नए पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद जून से लगभग 60 हजार पदोन्नतियां हुई हैं, हालांकि हाई कोर्ट में इन नियमों पर सुनवाई जारी है। हाई कोर्ट ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के शीघ्र निराकरण के लिए प्रयास करने को कहा है।

मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई 18 अगस्त तक स्थगित

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका के कारण हाई कोर्ट में आगे नहीं बढ़ सका। सोमवार को करीब एक घंटे की बहस के बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही रिट अपील पर सुनवाई उचित होगी। दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी की जल्द सुनवाई के लिए संयुक्त आवेदन देंगे। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अपने पुराने जुड़ाव का खुलासा किया, जिस पर किसी पक्ष को आपत्ति नहीं थी।

पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल, हाईकोर्ट में नियम 2025 पर सुनवाई संभव

मध्य प्रदेश में 2016 के बाद शुरू हुई पदोन्नतियों पर सवाल उठ रहे हैं, जहां कुछ विभागों में केवल नोटिस के आधार पर पदोन्नतियां रोकी जा रही हैं और अनारक्षित पदों पर कार्रवाई नहीं हो रही। भारतीय पशु चिकित्सा परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से शिकायत की है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने भी कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण की आड़ में पदोन्नति रोकने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति नियम 2025 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई संभावित है।

एमपी में 30 आईपीएस पद बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा

मध्य प्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 30 पद बढ़ सकते हैं, जिसके लिए पुलिस मुख्यालय ने राज्य सरकार को काडर रिव्यू का प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। वर्तमान में राज्य में 319 आईपीएस पद हैं। काडर रिव्यू हर पांच साल में होता है, और पिछला रिव्यू 2022 में हुआ था। नए पदों में से 33 प्रतिशत राज्य पुलिस सेवा से पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को मिलेंगे, जिससे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर सेवानिवृत्त होने वाले कई अधिकारियों को पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

प्रोफेसर की पदोन्नति व नियमितीकरण विवाद पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोफेसर डॉ. सोमपाल सिंह द्वारा दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. सिंह को नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव का सामना करना पड़ा है। डॉ. सिंह ने 1993 में एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उन्हें 2008 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि एमपीपीएससी अनुत्तीर्ण एक अन्य प्रोफेसर को 2006 से पदोन्नति मिली। अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, और याचिका में उच्च शिक्षा विभाग तथा एमपीपीएससी के सचिव सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।

मध्य प्रदेश में 60 हजार कर्मचारियों को पदोन्नति मिली, 40 हजार और जल्द

मध्य प्रदेश में 10 साल बाद अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति मिलनी शुरू हो गई है, जिसमें लगभग 60 हजार कर्मचारियों को पहले ही पदोन्नति मिल चुकी है। आगामी एक माह में 35 से 40 हजार और पदोन्नति आदेश जारी होने की उम्मीद है। ये पदोन्नतियां सशर्त हैं और न्यायालयों के आदेश के अधीन रखी गई हैं। सोमवार को हाई कोर्ट जबलपुर में पदोन्नति नियम 2025 को लेकर सुनवाई प्रस्तावित है, जिस पर निर्णय आने की संभावना है। सरकार ने अगले साल 1 जनवरी, 2026 को उपलब्ध पदों के लिए सितंबर-अक्टूबर में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें कराने का निर्णय लिया है।