मंडला और डिंडौरी जिलों में भारी बारिश के कारण रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की स्नातक परीक्षाओं में कई परीक्षार्थी शामिल नहीं हो पाए। सड़क और पुल-पुलियों पर पानी भरने से आवागमन बाधित हुआ, जिससे लगभग 20 परीक्षा केंद्रों पर छात्र समय पर नहीं पहुंच सके। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावित केंद्रों से अनुपस्थिति और परीक्षा छूटने के कारणों की रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अमरपुर-समनापुर मार्ग बंद होने से छात्रों को सर्वाधिक परेशानी हुई।
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को संबंधित रिकॉर्ड के साथ तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को तय की गई है। लाॅ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे, जिसमें 695 में से 156 कॉलेज सूटेबल पाए गए थे। बाद में 89 और कॉलेज कमियां दूर कर सूटेबल श्रेणी में आए।
जबलपुर में 10 अगस्त को कांवड़ यात्राएं निकलने के बावजूद रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुवि) की परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित होंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को सूचित किया है कि यातायात प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए उन्हें परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त समय से पहले पहुंचना होगा। परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनील दुबे ने पुष्टि की है कि परीक्षा कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बीएससी प्रथम वर्ष की परीक्षा सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक और बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक होगी।
मध्य प्रदेश में लगभग 70 हजार सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) सितंबर के अंत या अक्टूबर में आयोजित की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) को इसका प्रस्ताव और सिलेबस भेज दिया है। इस परीक्षा में लगभग 35 हजार निजी स्कूल शिक्षक भी शामिल होंगे। प्रश्न बैंक 15 अगस्त तक विमर्श पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों की स्थिति को लेकर संशय बना हुआ है, जिस पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है।
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा राज्य सेवा मुख्य परीक्षा जबलपुर के शासकीय मानकुंवर बाई महिला महाविद्यालय में 8 से 13 अगस्त तक आयोजित की जा रही है। परीक्षा के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, जिसमें प्रवेश से 90 मिनट पहले पहुंचना, बायोमेट्रिक सत्यापन, फोटो पहचान का मिलान और फ्रिस्किंग शामिल है। महिला अभ्यर्थियों की जांच महिला अधिकारियों द्वारा अलग कक्ष में होगी। केवल ब्लैक पेन, पारदर्शी पानी की बोतल, ई-प्रवेश पत्र और वैध फोटो पहचान पत्र ले जाने की अनुमति है। रीतेश दुबे को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो प्रश्नपत्रों के सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने तीसरी बार अपने परीक्षा कैलेंडर में बदलाव किया है, जिससे अगस्त में प्रस्तावित कई परीक्षाएं, जिनमें कृषि अधिकारी भर्ती परीक्षा भी शामिल है, अब सितंबर में होंगी। इससे पहले दिसंबर 2025 और अप्रैल में भी कार्यक्रम बदले गए थे। लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी और मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है, खासकर वनरक्षक और जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा में पदों को लेकर विवाद और अन्य भर्तियों में देरी के कारण। वरिष्ठ करियर काउंसलर शबनम खान ने इसे अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला बताया है।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने ग्रुप-2 उपसमूह-4 संयुक्त भर्ती परीक्षा-2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के माध्यम से राज्य के 61 विभागों में कुल 2,306 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिसमें पटवारी के 200 पद भी शामिल हैं। उम्मीदवार 18 अगस्त 2026 तक esb.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। परीक्षाएं 22 सितंबर 2026 से दो पालियों में आयोजित होंगी। स्नातक डिग्री और कंप्यूटर ज्ञान या CPCT स्कोर कार्ड अनिवार्य है।
मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2025 के तीसरे चरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अगस्त तक बढ़ा दी है। कुल 674 पदों के लिए अब तक 14000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अभ्यर्थियों की मांग पर यह निर्णय लिया गया, जिससे लगभग 1000 अतिरिक्त आवेदन आने की उम्मीद है। परीक्षा 4 अक्टूबर को दो सत्रों में होगी, जिसमें सामान्य अध्ययन और संबंधित विषय के प्रश्नपत्र शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार प्रतिस्पर्धा कम रहेगी। आयोग का ध्यान वर्तमान में वर्ष 2024 की भर्ती परीक्षाओं के साक्षात्कारों को पूरा करने पर केंद्रित है।
जबलपुर की छात्रा अंशिका सिंह ने नीट परिणाम में 296 अंकों के कथित अंतर को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका दावा है कि आंसर-की के आधार पर उनके 441 अंक बन रहे थे, जबकि आधिकारिक परिणाम में केवल 145 अंक दर्ज किए गए। छात्रा ने मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच और परिणाम में कथित विसंगति को दूर करने की मांग की है। मामले की सुनवाई प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ के समक्ष प्रस्तावित है, जिसमें अधिवक्ता दुर्गेश सिंगरोरे याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
जीवाजी विश्वविद्यालय ने सोमवार को 13 स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम घोषित किए। इनमें नई शिक्षा नीति के तहत बीए और बीएससी ऑनर्स चौथे वर्ष की परीक्षाएं तथा दो पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के दूसरे सेमेस्टर के परिणाम शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने परिणामों के साथ ऑनलाइन मार्कशीट उपलब्ध कराई है और अंकसंवीक्षा व उत्तरपुस्तिका अवलोकन के लिए सात दिन की समय सीमा निर्धारित की है। कई विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी विद डिस्टिंक्शन प्राप्त की है, जबकि कुछ परिणाम विथहेल्ड रखे गए हैं।