पशुपालन विभाग में हुए तबादलों को लेकर पशु चिकित्सकों और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर तबादलों की जांच की मांग की। अधिकारियों का आरोप है कि स्थानांतरण नीति का पालन नहीं किया गया और प्रशासनिक आवश्यकता के नाम पर मनमानी से पोस्टिंग की गई। ज्ञापन में गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और पति-पत्नी की पदस्थापना जैसी परिस्थितियों की अनदेखी का भी उल्लेख है। कुल 166 स्थानांतरण विवादों में हैं, जिनकी शासन जांच कर रहा है। स्थानांतरण अवधि के दौरान लखन पटेल विभाग के मंत्री थे, जिनसे हाल ही में यह विभाग वापस ले लिया गया है।
मध्य प्रदेश में 2016 के बाद शुरू हुई पदोन्नतियों पर सवाल उठ रहे हैं, जहां कुछ विभागों में केवल नोटिस के आधार पर पदोन्नतियां रोकी जा रही हैं और अनारक्षित पदों पर कार्रवाई नहीं हो रही। भारतीय पशु चिकित्सा परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से शिकायत की है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने भी कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण की आड़ में पदोन्नति रोकने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति नियम 2025 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई संभावित है।