देश के 19 राज्यों के 181 जिलों में लगभग 7,500 भूस्खलन संभावित स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट सर्वाधिक प्रभावित हैं। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र भूस्खलन संभावित है। अंधाधुंध निर्माण और वनों की कटाई को प्रमुख कारण माना गया है, जिससे सड़कों और सामरिक अवसंरचना को खतरा है। संसदीय समिति ने अनियंत्रित निर्माण रोकने और भू-तकनीकी आकलन कराने की सिफारिश की है।