उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर फिर से आकार ले रहा है। वर्ष 2020-21 में खोदाई के दौरान इसके अवशेष मिले थे, जिनमें आधार भाग, गर्भगृह, शिवलिंग और कई प्रतिमाएं शामिल हैं। पुरातत्व विभाग इन अवशेषों के आधार पर भूमिज शैली में मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहा है, जिसकी ऊंचाई 36 से 37 फीट रहेगी और लागत 65 से 90 लाख रुपये अनुमानित है। यह महाकाल मंदिर के प्राचीन इतिहास को पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के जंगलों में लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पुराने मूंगा जीवाश्म के प्रमाण मिले हैं। घड़े की आकृति में मिली ये संरचनाएं बताती हैं कि वर्तमान घने वन क्षेत्र में कभी समुद्री पर्यावरण रहा होगा। बेंगलुरु की जियोलॉजी लैब में जांच के बाद इसकी पुष्टि हुई। यह खोज अल्फ्रेड वेगनर के ‘महाद्वीपीय विस्थापन’ सिद्धांत को बल देती है। बैगा आदिवासी इन जीवाश्मों को एक के ऊपर एक रखकर ग्राम देवता के रूप में पूजते आ रहे हैं। यह प्रदेश में मिला पहला कोरल जीवाश्म है, जो समुद्री अतीत का स्पष्ट प्रमाण है।
धार के ग्राम देवरा में स्थित लगभग 900 वर्ष पुराना परमारकालीन शिव मंदिर पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज होने और 28 अगस्त 2024 को सर्वेक्षण पूरा होने के बावजूद संरक्षण की राह देख रहा है। स्थानीय लोगों को दो साल बाद भी कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है, जिससे मंदिर की सुरक्षा पर चिंता बढ़ रही है। यह मंदिर ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ गहरी धार्मिक आस्था का केंद्र भी है, जहां श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। क्षेत्रवासियों ने मंदिर के वैज्ञानिक संरक्षण और मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की मांग की है।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में ज्ञान भारत मिशन के तहत एक दुर्लभ सोने की मूठ वाली तलवार मिली है। पुरातत्वविदों को यह तलवार पुरानी पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण के दौरान प्राप्त हुई। तलवार पर फारसी भाषा में अंकित शिलालेख के अनुसार, इसे मुगल सम्राट शाहजहां ने करेरा किले के सेनापति सैयद सालार को भेंट किया था। यह तलवार सैयद सालार की नौवीं पीढ़ी की वंशज इत्रत जैदी के निजी संग्रह में सुरक्षित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आज भी मौजूद दुर्लभ मुगलकालीन हथियारों में से एक हो सकती है।
दतिया संग्रहालय में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का एक ऐतिहासिक 175 साल पुराना जीवित अवस्था का चित्र मिला है। दो फीट लंबा और पौने दो फीट चौड़ा यह चित्र रानी को घोड़े पर सवार कुलदेवी की पूजा के लिए जाते हुए दर्शाता है, जिसे 1849-50 के आसपास का माना जा रहा है। मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार के इतिहासकार डॉ. मो. वसीम खान के अनुसार, यह उनके पति गंगाधर राव के निधन से पहले का है। यह दुर्लभ चित्र ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के संग्रहण के दौरान सामने आया है और इसका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।