इंदौर नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने पर प्रतिदिन लगभग 14 लाख रुपये और सालाना 50 करोड़ रुपये खर्च करता है। इतनी भारी राशि खर्च होने के बावजूद शहर की सड़कें बदहाल हैं और गड्ढे कम नहीं हो रहे हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी 50 करोड़ के वार्षिक बजट को स्वीकार किया है। लगभग 70 प्रतिशत सीमेंटेड सड़कों पर डामर के पैचवर्क की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बारिश में डामर हट जाता है। जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि वर्षा के कारण काम रुका है और ठेकेदार बारिश थमने पर बिना अतिरिक्त शुल्क के दोबारा पैचवर्क करेंगे।
इंदौर में कांग्रेस ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और भाजपा परिषद के चार साल के कार्यकाल की नाकामियां गिनाते हुए उन पर हमला बोला है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने पत्रकार वार्ता में बेलेश्वर मंदिर बावड़ी और भागीरथपुरा में दूषित पानी से कुल 72 मौतों के लिए महापौर को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने नगर निगम पर 600 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी बकाया और वित्तीय संकट का भी आरोप लगाया। कांग्रेस ने घोटालों, टैक्स वृद्धि और बदहाल व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए महापौर व परिषद से जनता से माफी मांगने की मांग की।
इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर सरकार ने बुधवार 5 अगस्त को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे किए। इन वर्षों में नगर निगम ने ग्रीन बांड जारी कर 244 करोड़ रुपये जुटाए और जलूद में 60 मेगावाट का सोलर पार्क विकसित किया, जिससे प्रतिमाह चार करोड़ रुपये की बचत हो रही है। हालांकि, भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में 36 लोगों की मौत और 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी बिल भुगतान घोटाले जैसी घटनाओं ने शहर की छवि को धूमिल किया। कई विकास कार्य पूरे हुए, लेकिन दूषित पानी, अधूरी सड़कें और निगम भवन जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
इंदौर नगर निगम में भाजपा परिषद का चार साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस दौरान परिषद ने बड़े प्रोजेक्टों पर जोर दिया, लेकिन शहर में दूषित पानी की आपूर्ति और गड्ढों से भरी सड़कों की समस्या बनी रही। पिछले साल भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 35 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके अतिरिक्त, 100 करोड़ रुपये का घोटाला भी उजागर हुआ, जिसकी जांच अभी जारी है। निगम ने 300 करोड़ रुपये का सोलर प्लांट लगाया और नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू किया, जिस पर 1,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि, नेहरू स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एमआर-4 सड़क जैसे कई प्रोजेक्ट अधूरे रहे।