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लेखक अमीश त्रिपाठी: विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में हों

प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा है कि जेन-जी को विरोध प्रदर्शन का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यह हमेशा संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। पुणे में अपनी नई बाल पुस्तक ‘ध्रुव-तारा: द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज’ के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी ने आंदोलन किए हैं, इसलिए केवल जेन-जी को दोष देना उचित नहीं है। अमीश ने डॉ. आंबेडकर के ‘ग्रामर ऑफ अनार्की’ का जिक्र करते हुए संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय इतिहास पढ़ाने के तरीके में बदलाव और औपनिवेशिक सोच को हटाने की भी बात कही, जिसका उनकी नई पुस्तक के माध्यम से प्रयास किया गया है।

यूसीसी पर अधिवक्ता शीराज कुरैशी की पुस्तक ‘इन सपोर्ट ऑफ यूसीसी-एमपी’ चर्चा में

अधिवक्ता शीराज कुरैशी की पुस्तक ‘इन सपोर्ट ऑफ यूसीसी-एमपी’ समान नागरिक संहिता विधेयक के विधानसभा में पेश होने के बाद चर्चा में है। कुरैशी का दावा है कि यह पुस्तक संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 44 के आलोक में यूसीसी की आवश्यकता और कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी कुरैशी ने 2006 से इस विषय पर अध्ययन किया है। पुस्तक में मुस्लिम समाज में यूसीसी को लेकर प्रचलित भ्रांतियों पर चर्चा की गई है, और यह न्याय तथा समानता की अवधारणा को मजबूत करती है। इसका अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हो चुका है।