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चित्रकूट में मंदाकिनी इंटेकवेल के पास सड़ा कुत्ता मिला, पेयजल शुद्धता पर उठे सवाल

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी से कर्वी नगर को पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन इंटेकवेल से 50 मीटर दूर एक सड़ा हुआ कुत्ता मिलने से नदी में गंदगी और सीवर के पानी के आरोपों ने पेयजल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके विरोध में सत्याग्रही अभिमन्यु सिंह ने साथियों के साथ जल सत्याग्रह और आमरण अनशन शुरू किया। प्रशासन के आश्वासन पर सत्याग्रह समाप्त हो गया। एसडीएम सदर अजय कुमार ने आंदोलनकारियों से वार्ता के बाद समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया है।

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन लक्ष्य से पीछे; सीहोर में 43% परिवारों तक नल जल नहीं

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत 77.21 प्रतिशत परिवारों तक नल जल पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि, जिला स्तरीय आंकड़े इससे अलग तस्वीर दर्शाते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में लगभग 43 प्रतिशत और विदिशा में लगभग 33 प्रतिशत परिवारों तक अब भी नल का पानी नहीं पहुंचा है। प्रदेश के 8 जिलों, जिनमें सतना, छतरपुर और सिंगरौली शामिल हैं, में आधे से अधिक परिवार नल जल सुविधा से वंचित हैं। कुल 23 जिलों में नल जल कवरेज 70 प्रतिशत से कम है। लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अनुसार, कम कवरेज का कारण बहु-ग्राम जल योजनाओं का निर्माणधीन होना है।

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर: ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना एक साझा सामाजिक दायित्व है, जो भविष्य में पेयजल संकट से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान 21 जुलाई से 4 अगस्त तक पूरे देश में चलाया गया, जो ‘जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन-2026’ से जुड़ा है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्षा जल संचयन के आह्वान पर आधारित है और इसका उद्देश्य जल संग्रह, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारत को जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती जल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय की आवश्यकता है।

जबलपुर के गांवों में भूजल स्तर गिरने से पेयजल संकट गहराया

जबलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश के कारण गहराते पेयजल संकट की समस्या सामने आई है। पहले 70-80 फीट पर मिलने वाला पानी अब 100 फीट पर भी उपलब्ध नहीं है। जिले के 500 से अधिक ग्राम पंचायतों में स्थापित 10 हजार हैंडपंपों में से 3500 से अधिक का जलस्तर 10 से 30 फीट नीचे गिर गया है, जिससे लगभग 40 प्रतिशत हैंडपंप पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। शिकायतें बढ़ने के बावजूद भूजल स्तर में गिरावट के कारण समस्या बनी हुई है, और अमृत जल योजना का शुरू न होना भी संकट को बढ़ा रहा है।

इंदौर निगम परिषद के चार साल: प्रमुख प्रोजेक्टों पर जोर, पानी और सड़कों की समस्याएँ बनी रहीं

इंदौर नगर निगम में भाजपा परिषद का चार साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस दौरान परिषद ने बड़े प्रोजेक्टों पर जोर दिया, लेकिन शहर में दूषित पानी की आपूर्ति और गड्ढों से भरी सड़कों की समस्या बनी रही। पिछले साल भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 35 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके अतिरिक्त, 100 करोड़ रुपये का घोटाला भी उजागर हुआ, जिसकी जांच अभी जारी है। निगम ने 300 करोड़ रुपये का सोलर प्लांट लगाया और नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू किया, जिस पर 1,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि, नेहरू स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एमआर-4 सड़क जैसे कई प्रोजेक्ट अधूरे रहे।

भोपाल के यूनियन कार्बाइड क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति जारी, ब्लूमून कॉलोनी में सीवेज के बीच दबी मिलीं पेयजल पाइपलाइनें

भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास दूषित पेयजल आपूर्ति का मामला गहरा गया है। गैस पीड़ित संगठनों की रिपोर्ट में पानी में ‘फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ पाए जाने के बाद नगर निगम ने भले ही शुद्ध पेयजल का दावा किया हो, लेकिन ‘नवदुनिया’ टीम के ब्लूमून कॉलोनी के निरीक्षण में सच्चाई सामने आई। पेयजल पाइपलाइनें गंदगी और नालियों के बीच दबी मिलीं। स्थानीय निवासियों ने गंदे पानी से बीमारी, चूहे निकलने और मरम्मत न होने की शिकायत की है। एक बच्चे को टाइफाइड होने की बात भी सामने आई है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: पुनर्वास और मुआवजे को लेकर छतरपुर-पन्ना में विरोध जारी

केन-बेतवा लिंक परियोजना का मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में प्रभावित परिवारों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। इन परिवारों का आरोप है कि पुनर्वास, मुआवजा और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में खामियां हैं। राज्य सरकार का दावा है कि विरोध सीमित है और प्रभावितों को नियमों के तहत आर्थिक सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह परियोजना बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपये है। परियोजना से 10.