12 अगस्त को देश के 19 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और 90 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के लिए चेतावनी दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और पूर्वी राज्यों में आकाशीय बिजली का खतरा है। चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव का क्षेत्र मौसम में सक्रियता का कारण हैं। लोगों, यात्रियों, किसानों और मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
देश के 19 राज्यों के 181 जिलों में लगभग 7,500 भूस्खलन संभावित स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट सर्वाधिक प्रभावित हैं। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र भूस्खलन संभावित है। अंधाधुंध निर्माण और वनों की कटाई को प्रमुख कारण माना गया है, जिससे सड़कों और सामरिक अवसंरचना को खतरा है। संसदीय समिति ने अनियंत्रित निर्माण रोकने और भू-तकनीकी आकलन कराने की सिफारिश की है।
महाराष्ट्र के नासिक में शनिवार और रविवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे जिले के कुछ इलाकों में घरों की दीवारों में दरारें आ गईं। अधिकारियों ने किसी के हताहत होने की खबर नहीं दी है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, शनिवार रात 10 बजे 4.3 तीव्रता और रविवार सुबह 5:33 बजे 3.3 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास हटगढ़ पर्वत श्रृंखला के नजदीक भानवाड़ इलाके में जमीन से 5 किलोमीटर की गहराई पर था। जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
दतिया में पिछले दो दिनों की लगातार वर्षा से सिंध नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सेवढ़ा का ऐतिहासिक राजाशाही कालीन छोटा पुल जलमग्न हो गया है, जिसके लगभग आधे मेहराब पानी में डूब चुके हैं। नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी वर्षा से पानी की आवक निरंतर जारी है, जिससे नदी पूरे वेग से बह रही है। यह वर्षों पुराना पुल राजाशाही काल की इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे भीड़ न लगाने और सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि लापरवाही से हादसा हो सकता है। जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संबंधित विभाग अलर्ट पर हैं।
कर्नाटक के शिवमोगा जिले के इंदिरानगर में रविवार सुबह भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। मृतकों में 35 वर्षीय मल्लिकार्जुन, उनकी 28 वर्षीय पत्नी नागवेणी और उनका तीन साल का बेटा संतोष शामिल हैं, जो कोप्पल जिले के गंगावती तालुक के रहने वाले थे। रात करीब ढाई बजे पहाड़ी का हिस्सा झोपड़ी पर गिरने से यह हादसा हुआ। इस घटना में एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। दमकल और आपातकालीन सेवा विभाग तथा पुलिस की टीम ने बचाव अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला।
दमोह जिले के तारादेही और कोपा देवरी क्षेत्र में सोम-मंगल की रात करीब तीन बजे अचानक धरती हिलने से लोग घबरा गए। स्थानीय लोगों ने दो हल्के झटके महसूस किए, जिससे सोते समय उनके पलंग हिलने लगे और कई लोग नींद में ही जमीन पर गिर गए। घरों में रखे बर्तन और अन्य सामान भी हिलते हुए महसूस किए गए। प्रत्येक झटका लगभग दो सेकंड तक चला और दोनों के बीच 10 सेकंड का अंतर था। ग्रामीणों ने इन झटकों को भूकंप के हल्के झटके बताया है, हालांकि जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। यह घटना पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही।
देशभर में बारिश का कहर जारी है, जिसके कारण बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से कई लोगों की जान गई है। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और 11 जिलों में 65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। महाराष्ट्र के पालघर और ठाणे जिलों में भी भारी बारिश से जलभराव और यातायात बाधित हुआ है, जबकि गुजरात के वलसाड, सूरत और अहमदाबाद में भी स्थिति गंभीर है। मौसम विज्ञान विभाग ने कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया है।
असम में लगातार मानसूनी बारिश से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण ऊपरी असम के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन जल राहत’ के तहत अब तक 571 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। यह अभियान 19 जुलाई से चौबीसों घंटे चल रहा है, जिसमें स्पीयर कोर असम सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। सेना बचाव, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध करा रही है। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में तीन विशेष टीमें तैनात हैं। कुछ इलाकों में जलस्तर कम होने के बावजूद राहत कार्य जारी है।