मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के जंगलों में लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पुराने मूंगा जीवाश्म के प्रमाण मिले हैं। घड़े की आकृति में मिली ये संरचनाएं बताती हैं कि वर्तमान घने वन क्षेत्र में कभी समुद्री पर्यावरण रहा होगा। बेंगलुरु की जियोलॉजी लैब में जांच के बाद इसकी पुष्टि हुई। यह खोज अल्फ्रेड वेगनर के ‘महाद्वीपीय विस्थापन’ सिद्धांत को बल देती है। बैगा आदिवासी इन जीवाश्मों को एक के ऊपर एक रखकर ग्राम देवता के रूप में पूजते आ रहे हैं। यह प्रदेश में मिला पहला कोरल जीवाश्म है, जो समुद्री अतीत का स्पष्ट प्रमाण है।