अहमदाबाद की नेहा भट्ट ने 2021 में एक दर्दनाक हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने सात ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ बाबा बर्फानी अमरनाथ और केदारनाथ की कठिन यात्राएं पूरी कीं। नेहा ने 2025 में 22 किलोमीटर की केदारनाथ यात्रा और 2026 में 18 किलोमीटर की अमरनाथ यात्रा पैदल चलकर संपन्न की। बाबा महाकाल में उनकी अटूट आस्था है, जिसने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी भावुक हो गए और कहा कि वह आज भी अपनी मां की कमी महसूस करते हैं, जबकि पूर्व राष्ट्रपति ने कम उम्र में मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कोविंद के जीवन संघर्ष को प्रेरणा बताया और उनकी आत्मकथा को भारतीय लोकतंत्र व समाज की धरोहर कहा। उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कोविंद के निरंतर कार्य की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को याद किया, कहा उनका साहस प्रेरणा बना रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो’ के आह्वान ने स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा भरी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का ‘करो या मरो’ का आह्वान करोड़ों भारतीयों के लिए साहस की आवाज बना। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस आंदोलन को स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक अध्याय बताया, जिसकी ‘अगस्त क्रांति’ ने नई चेतना का संचार किया।
इंदौर में लगातार कम होती हरियाली के संकट के बीच कई नागरिक अपने घरों में ही हरित क्षेत्र विकसित कर रहे हैं। वे आंगन, छत और बालकनी को बगीचों में बदल रहे हैं, जहां फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे लगाए गए हैं। राजेश राठी, सीमा लक्ष्यसेन, अनिल जैन और दिव्या माथुर जैसे व्यक्तियों ने अपने घरों में लगभग 80 से 250 पौधे लगाए हैं। उन्होंने पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था भी की है, जिससे उनके घरों में पक्षियों और तितलियों की उपस्थिति बढ़ गई है। यह पहल न केवल घर का तापमान कम रखती है बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रही है।
उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा अपने नन्हे प्रशंसक सहस्रजीत तिवारी से मिलने उनके घर पहुंचे। सेंटमेरी स्कूल में दूसरी कक्षा का छात्र सहस्रजीत आठ महीने पहले एसपी का एक वीडियो देखकर उनका प्रशंसक बन गया था, जिसमें एसपी एक गुम हुए बच्चे को चॉकलेट खिला रहे थे। उसके पिता ने उससे वादा किया था कि अच्छा काम करने पर वे उसे एसपी से मिलवाएंगे। हाल ही में, सहस्रजीत ने पुलिस के ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान पर एक वीडियो बनाया, जिसे देखकर एसपी ने स्वयं बच्चे से मिलने का निर्णय लिया और उसका सपना पूरा किया।
सिंगरौली नगर पालिक निगम की आयुक्त सविता प्रधान ने कैंसर पीड़ित एक बच्ची के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए स्वयं अपना मुंडन करा लिया। कीमोथेरेपी के कारण बाल झड़ने से बच्ची खुद को अलग और असहज महसूस कर रही थी। आयुक्त ने बच्ची को यह एहसास दिलाने के लिए यह कदम उठाया कि वह अकेली नहीं है। उनके इस मानवीय और संवेदनशील कार्य की शहर भर में व्यापक सराहना हो रही है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने इसे मानवता और करुणा का प्रेरणादायक उदाहरण बताया है।
मध्यप्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को 33 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया है। चयन के बाद उन्होंने कहा कि क्रिकेट में उम्र नहीं, बल्कि प्रदर्शन और फिटनेस मायने रखती है। सारांश ने बताया कि 2014-15 में पिता को कैंसर होने के बाद उन्होंने क्रिकेट छोड़ दिया था, लेकिन पिता के प्रेरणादायक संदेश ने उन्हें वापस आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और पत्नी को दिया। सारांश ने अपने करियर में चंद्रकांत पंडित की भूमिका और अन्य खिलाड़ियों से मिली प्रेरणा का भी जिक्र किया।
अभिनेत्री नैना सरीन ने आईटी की नौकरी छोड़कर अभिनय का सफर चुना और मुंबई में 60 ऑडिशन के बाद अपना पहला काम हासिल किया। ‘मेड इन हेवन’ और ‘होटल मुंबई’ जैसी परियोजनाओं में दिखीं नैना ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि एफटीआईआई ने उन्हें आत्म-अभिव्यक्ति सिखाई। उन्होंने मुंबई में पैसों की चुनौती को सबसे बड़ा संघर्ष बताया और नए कलाकारों को आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की सलाह दी। वर्तमान में वह स्वतंत्र फिल्मों की शूटिंग और एक मिनी-सीरीज लिखने में व्यस्त हैं, जबकि उनका मुख्य ध्यान पूरी तरह से अभिनय पर है।
ऋषिकांत सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 264 किलो वजन उठाकर रजत पदक जीता। यह पदक उनके परिवार के 15-16 साल के अथक संघर्ष का परिणाम है। उनकी मां और बहनों ने खेतों में मजदूरी की, बड़े भाई अमरजीत सिंह ने दोस्तों से कर्ज लेकर डाइट व प्रतियोगिताओं का खर्च उठाया। पिता को ब्लड कैंसर होने के बावजूद परिवार ने ऋषिकांत की तैयारी प्रभावित न हो, इसके लिए इलाज के लिए उनसे पैसे नहीं लिए। ऋषिकांत ने अपनी बहनों की शादियां भी महत्वपूर्ण मुकाबलों के कारण छोड़ दीं। परिवार ने अपने सपनों का त्याग कर ऋषिकांत के खेल करियर को आगे बढ़ाया।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर देश के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने डॉ. कलाम के राष्ट्र निर्माण, विज्ञान और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अमूल्य योगदान को याद किया। नेताओं ने उन्हें दूरदर्शी, जनता के राष्ट्रपति और प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया, जिनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं।