इंदौर के तुकोगंज क्षेत्र में 32 वर्षीय असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्या सोनी ने अपने किराए के फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार शाम को हुई जब उनकी रूम पार्टनर बाहर गई हुई थी। वापस लौटने पर दरवाजा अंदर से बंद मिला, जिसे पड़ोसियों की मदद से तोड़ा गया। अंदर दिव्या पंखे से लटकी मिलीं। आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं है और कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। छतरपुर की मूल निवासी दिव्या दो साल से इंदौर में रहकर ‘विक्रम कॉलेज’ में कार्यरत थीं। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
ग्वालियर के महाराजपुरा स्थित एयरforce स्टेशन पर एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने बियर की बोतलों में पेट्रोल भरकर आग लगाई और उन्हें गेट के पास फेंक दिया। वायुसेनाकर्मियों ने उसे तत्काल पकड़ लिया। आरोपी को मानसिक रोगी बताया गया है और उसे मानसिक आरोग्यशाला भिजवा दिया गया है। घटना के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो और डिफेंस इंटेलिजेंस सहित अन्य खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर आ गईं। आरोपी ने पूछताछ में दिमाग हैक होने की बात कही। वह आंध्रप्रदेश के एक निजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है।
मध्य प्रदेश के सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विनोद भारद्वाज पर दर्जनभर से अधिक महिला शोधार्थियों ने मानसिक व यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं ने देर रात अनुचित मैसेज भेजने, डिनर का दबाव बनाने और शोध में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जोरदार हंगामे और ज्ञापन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर भारद्वाज को विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया। मामले की विस्तृत जांच आंतरिक शिकायत समिति को सौंपी गई है, जिसकी रिपोर्ट के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोफेसर डॉ. सोमपाल सिंह द्वारा दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. सिंह को नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव का सामना करना पड़ा है। डॉ. सिंह ने 1993 में एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उन्हें 2008 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि एमपीपीएससी अनुत्तीर्ण एक अन्य प्रोफेसर को 2006 से पदोन्नति मिली। अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, और याचिका में उच्च शिक्षा विभाग तथा एमपीपीएससी के सचिव सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।
हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामान्य एवं व्यावहारिक भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को महिला शोधार्थियों के उत्पीड़न, दबाव बनाने और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों के चलते प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन आंतरिक शिकायत समिति की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठा रहा है। शोधार्थियों ने जुलाई में मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार और गैर-अकादमिक गतिविधियों के लिए दबाव बनाने की शिकायत की थी, जिसमें सोशल मीडिया पर डिनर के लिए बार-बार दबाव बनाना भी शामिल था।