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भरण-पोषण तय करने से पहले पति-पत्नी की आय का पूर्ण आकलन अनिवार्य: MP हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि भरण-पोषण मामलों में पति-पत्नी की वास्तविक आय, संपत्ति, खर्च और वित्तीय दायित्वों का पूर्ण आकलन किए बिना मेंटेनेंस तय नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने दमोह फैमिली कोर्ट के 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के आदेश को निरस्त कर मामला पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। कोर्ट ने प्रदेश की सभी फैमिली कोर्टों को निर्देश दिए कि भविष्य में प्रत्येक भरण-पोषण आदेश में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए।

हाईकोर्ट ने 10 माह की बच्ची से मां को पुलिस सुरक्षा में प्रतिदिन 2 घंटे मिलने की अनुमति दी

एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी 10 माह की बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति दी। यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में होगी। याचिकाकर्ता दमोह की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी जिसने बच्ची को जन्म दिया था। बाल कल्याण समिति ने मां होने पर संदेह व्यक्त किया था, हालांकि महिला ने जन्म प्रमाण-पत्र व डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत किए थे।