प्रधान आरक्षक विष्णु बघेल का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके गृह ग्राम परसवाड़ा लाया गया, जहां असम के नागांव जिले में एक सीआरपीएफ कैंप में हुई गोलीबारी में उनकी शहादत हुई थी। तिरंगे में लिपटे ताबूत के गांव पहुंचने पर माहौल गमगीन हो गया। क्षेत्रीय विधायक मधु भगत, एसडीएम, तहसीलदार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में शेरपार रोड शक्ति घाट पर राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। यह घटना एएसआई बल्लानी प्रेमाबरम द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी के कारण हुई थी, जिसमें एसआई रामनवाल सिंह यादव भी शहीद हुए और आरोपी ने बाद में आत्महत्या कर ली।
असम में सीआरपीएफ की 34वीं बटालियन में हुई गोलीबारी में बालाघाट के जवान विष्णु बघेल शहीद हो गए। मंगलवार सुबह एएसआई बलानी प्रेमावरम ने क्वार्टर गार्ड और बैरक में अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें एसआई राम नवल सिंह यादव भी शहीद हुए और एएसआई माने गोबिंद घायल हो गए। आरोपी एएसआई ने बाद में आत्महत्या कर ली। शहीद विष्णु बघेल (44) अपने परिवार के इकलौते पुत्र थे, उनका पार्थिव शरीर बुधवार को बालाघाट स्थित पैतृक गांव लाया जाएगा।
कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस, धैर्य और सैन्य कौशल का प्रतीक है, जिसे हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1999 में द्रास, बटालिक सहित दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में लड़े गए इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने सीमित ऑक्सीजन और ऊंची चोटियों पर दुश्मन की मौजूदगी जैसी विषम चुनौतियों का सामना किया। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती सामरिक बढ़त के बावजूद, भारतीय सेना ने सुनियोजित अभियान, असाधारण साहस और प्रभावी तोपखाना समर्थन से सभी ठिकानों को मुक्त कराया। युद्ध में 527 सैनिक शहीद हुए और 1,300 से अधिक घायल हुए।