मध्य प्रदेश में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष चिंता का विषय बन गया है। इस वर्ष जनवरी से अब तक 50 ग्रामीणों की मौत वन्यजीवों के हमलों में हुई है, जबकि 2026 के शुरुआती 8 महीनों में 45 से अधिक बाघ भी मारे गए हैं। ग्रामीण महुआ, जलाऊ लकड़ी और तेंदू पत्ता बीनने जैसे कार्यों के लिए जंगल में जाते हैं, जिससे वन्यजीवों से आमना-सामना का खतरा बढ़ता है। सरकार ने पांच साल में मुआवजे के तौर पर 88.38 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है, जिसमें 2024-25 में 20.05 करोड़ रुपये से अधिक शामिल हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या 980 होने का अनुमान है, जबकि 2022 की गणना में यह 785 थी।
बालाघाट जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित मालखेड़ी गांव के पास एक बाघ ने राजकुमार परते (40) नामक युवक पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। शुक्रवार सुबह हुई इस घटना में दो अन्य लोग बाल-बाल बच गए। राजकुमार को सिविल अस्पताल बैहर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और उन्होंने वन विभाग से गश्त बढ़ाने तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। यह एक सप्ताह में बाघ के हमले की तीसरी घटना है।
उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर परिक्षेत्र में 4-5 वर्षीय बाघ का शव मिला, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर घेराबंदी कर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से सघन तलाशी ली गई, जिसमें कोई फंदा या हथियार बरामद नहीं हुआ। पोस्टमार्टम में बाघ के दांत और नाखून सुरक्षित पाए गए, जिससे शिकार की आशंका कम हुई। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा नमूने वैज्ञानिक परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
बालाघाट जिले के पर्रापुर बैगाटोला गांव में शनिवार रात एक बाघ ने घर में सो रही 45 वर्षीय महिला सुगनी बाई धुर्वे पर हमला कर उसे मार डाला। बाघ महिला को उठाकर बाहर ले गया, लेकिन परिजनों के शोर मचाने पर उसे छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। महिला के सिर पर गंभीर हमले से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। यह गांव कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बफर जोन से सटा है, जहाँ पिछले कुछ महीनों से बाघ देखे जाने की शिकायतें मिल रही थीं। वन विभाग ने गश्त बढ़ाने और सतर्क रहने की अपील की है, जबकि प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया है।
बालाघाट के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में एक साल के भीतर दो बाघों की मौत के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। हाल ही में बाघ का शव मिलने पर विभाग ने पूरे रिजर्व क्षेत्र में लगातार निगरानी के लिए तीन विशेष गश्ती टीमें तैनात की हैं। बहियाटिकुर सर्किल में हुई इन मौतों में से एक बाघ आपसी संघर्ष में मरा, जबकि एक बाघिन का शव नाले की बाढ़ में बहकर आया था, जिसे वनकर्मियों ने अवैध रूप से जला दिया था। क्षेत्र में बाघों की बढ़ती संख्या और सीमित क्षेत्र के कारण आपसी संघर्ष बढ़ रहा है, जिससे बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में भी देखे जा रहे हैं।
इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय बाघों की संख्या में देश में दूसरे स्थान पर है और छोटे चिड़ियाघरों में समग्र पशु विविधता तथा प्रजनन में पहले स्थान पर है। पिछले दशक में 26 बाघ शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 22 स्वस्थ बड़े हुए। वर्तमान में चिड़ियाघर में 13 बाघ, 15 शेर और 3 तेंदुए हैं, जिनकी कुल संख्या 31 है। जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव प्रजनन की सफलता का श्रेय तनावमुक्त वातावरण, सावधानीपूर्वक पैडिग्री जांच और पशु व्यवहार की वैज्ञानिक निगरानी को देते हैं। चिड़ियाघर के बाघों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, जो देश भर से आगंतुकों को आकर्षित करते हैं।
इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय बाघों के प्रजनन के लिए एक उत्कृष्ट केंद्र बन गया है, जहाँ पिछले 10 वर्षों में 25 से अधिक शावकों का जन्म हुआ और 22 वयस्क हुए। चिड़ियाघर ने एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लगभग 20 बाघों को अन्य चिड़ियाघरों में भेजा है, और वर्तमान में यहां 13 बाघ हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों के सफल प्रजनन के लिए तनाव मुक्त माहौल और विस्तृत आनुवंशिक जांच महत्वपूर्ण हैं, जो इंदौर चिड़ियाघर में सुनिश्चित की जाती हैं। हर साल बड़ी संख्या में आगंतुक, विशेषकर बच्चे, बाघों को देखने आते हैं।
मध्य प्रदेश ने बाघ संरक्षण में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिससे राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 785 हो गई है। पारंपरिक जंगल छोटे पड़ने लगे हैं और बाघ नए इलाकों में भी देखे जा रहे हैं। बाघों को ‘पुजारी’, ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘मौसी मां’ जैसे अनोखे नाम दिए गए हैं, जो पर्यटकों के बीच उनकी पहचान बढ़ाते हैं। मां से बिछड़े शावकों को जंगल में दोबारा बसाने का ‘रिवाइल्ड’ मॉडल सफल रहा है, जिससे 20 से अधिक शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। दो नए टाइगर रिजर्व भी बनाए गए हैं और निगरानी बढ़ाई गई है।
बुलंद सोच, बालाघाट। दक्षिण वन मंडल बालाघाट के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में विश्व बाघ दिवस पर बाघिन गौरा का डेढ़ वर्षीय शावक ‘सूखा’ मृत पाया गया। बुधवार, 29 जुलाई को गश्त के दौरान मिले शव पर गंभीर चोट के निशान थे, जिससे आपसी संघर्ष में मौत की आशंका है। ‘सूखा’ दस माह से लापता था और मां से बिछड़ने के कारण कमजोर हो गया था। सीसीएफ गौरव चौधरी सहित वन अमले ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्र को सील किया। प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें गहरे घावों की पुष्टि हुई। सोनेवानी में एक साल के भीतर यह दूसरी बाघ की मौत है, जिससे वन अधिकारियों की लापरवाही पर चिंता जताई गई है।
इटारसी के केसला स्थित झुनकर ग्राम पंचायत के बंगलापुरा क्षेत्र में बाघ की लगातार गतिविधियों से ग्रामीण दहशत में हैं। कई मवेशी बाघ का शिकार बन चुके हैं, जिससे किसानों और पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। लोग खेतों में जाने से डर रहे हैं। शनिवार को ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी बोरी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई, गश्त बढ़ाने, सुरक्षा इंतजाम करने और आवश्यकता पड़ने पर बाघ को सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग की। पूर्व में भी आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।