केरलम के तिरुवनंतपुरम में नौ वर्षीय बच्ची के पेट और छोटी आंत से एक किलोग्राम बालों का गुच्छा सर्जरी द्वारा निकाला गया। बच्ची ‘रैपुन्जेल सिंड्रोम’ से पीड़ित थी, जो एक दुर्लभ स्थिति है जिसके दुनिया भर में 100 से भी कम मामले सामने आए हैं। नेय्याट्टिनकारा स्थित निम्स मेडिसिटी में हुई इस सफल सर्जरी के बाद बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया। उसे लगातार पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था, और जांच में आंत में गंभीर रुकावट तथा बालों का गुच्छा पाया गया। डॉ. बीजू आई जी नायर की देखरेख में यह जटिल सर्जरी हुई।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के अनुसार, प्रदेश में जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराने वाली माताओं का प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाने वाली माताओं की संख्या 74% से घटकर 56.4% हो गई है। इसी दौरान पांच साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया 6.4% से बढ़कर 10.5% हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मां का दूध बच्चों को डायरिया और अन्य संक्रमणों से बचाता है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी छह माह तक केवल स्तनपान का प्रतिशत कम है, जिससे बच्चों में कुपोषण की गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं।
सागर के 13 वर्षीय अभि ने गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी गंभीर बीमारी से साढ़े तीन महीने की लंबी लड़ाई के बाद जीत हासिल की है। 13 अप्रैल 2026 को हमीदिया अस्पताल में भर्ती अभि को वेंटिलेटर पर रखा गया था और कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों की टीम की मेहनत और आयुष्मान भारत योजना के तहत मिले निशुल्क इलाज से अब वह स्वस्थ होकर घर जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने इसे सरकारी अस्पतालों में उच्चस्तरीय इलाज के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।