इंदौर के अवैध प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम को बुजुर्गों से मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने खाली करा दिया। इस दौरान एक 30 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला और उसका बेटा बिछड़ गए; बच्चे को बाल कल्याण समिति ने स्पेशल एडाप्शन एजेंसी को सौंप दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया और शासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आश्रम सामाजिक न्याय विभाग की अनुमति के बिना निगम के सामुदायिक भवन में अवैध रूप से चल रहा था। आश्रम का संचालन महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसायटी कर रही थी जिसके पास आवश्यक पंजीयन और दस्तावेज नहीं थे।
जीआरपी भोपाल ने “ऑपरेशन हमदर्द” के तहत 11 दिन में एक माह की लावारिस बच्ची के माता-पिता को खोज निकाला है। बच्ची 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-6 पर मिली थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और सोशल मीडिया की मदद से परिवार का पता लगाया। दंपती ने आर्थिक तंगी के कारण बच्ची को स्टेशन पर छोड़ा था। वे पुणे में मजदूरी करते हैं और बिहार के निवासी हैं। समाचार देखकर उन्हें पछतावा हुआ और वे बच्ची का हाल जानने भोपाल पहुंचे, जहां जीआरपी ने उन्हें पहचान लिया। माता-पिता के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई है, और बच्ची के भविष्य का निर्णय बाल कल्याण समिति करेगी।
एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी 10 माह की बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति दी। यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में होगी। याचिकाकर्ता दमोह की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी जिसने बच्ची को जन्म दिया था। बाल कल्याण समिति ने मां होने पर संदेह व्यक्त किया था, हालांकि महिला ने जन्म प्रमाण-पत्र व डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत किए थे।