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मध्य प्रदेश NEET UG-2026 काउंसलिंग: 47 मेडिकल-डेंटल संस्थान शामिल, 20 सरकारी और 15 निजी मेडिकल कॉलेज MBBS के लिए

मध्य प्रदेश में नीट यूजी-2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग के लिए चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा कॉलेजों की आधिकारिक सूची जारी कर दी गई है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) द्वारा मंगलवार को जारी इस सूची में प्रदेश के कुल 47 सरकारी और निजी संस्थान शामिल हैं। एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए 20 सरकारी और 15 निजी मेडिकल कॉलेज भाग ले रहे हैं, जिनमें गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, एमजीएम इंदौर सहित कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। वहीं, बीडीएस पाठ्यक्रमों के लिए एक सरकारी और 11 निजी डेंटल कॉलेज काउंसलिंग प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। यह सूची नीट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को चॉइस फिलिंग में सहायता प्रदान करेगी।

मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा नहीं रहेगा

मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में अब मैनेजमेंट कोटा नहीं रहेगा। एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश पुराने नियमों के तहत ही होगा, जिसमें 85% सीटें स्टेट कोटा और 15% एनआरआई कोटे से भरी जाएंगी। शासन ने 35% मैनेजमेंट कोटा पुनः शुरू करने के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यह कोटा 2014 से बंद था। काउंसलिंग प्रक्रिया 5 अगस्त से पंजीयन के साथ शुरू होगी, जिसमें 19 शासकीय और 14 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

एमबीबीएस-बीडीएस दाखिले के लिए नीट यूजी-2026 काउंसलिंग का टेंटेटिव शेड्यूल जारी

मध्य प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट यूजी-2026 काउंसलिंग का टेंटेटिव शेड्यूल जारी हो गया है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त कार्यालय ने पहले राउंड का कार्यक्रम घोषित किया है, जिसके तहत रजिस्ट्रेशन 5 से 13 अगस्त तक होंगे। सीट मैट्रिक्स 11 अगस्त को जारी होगी, जिस पर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। स्टेट मेरिट लिस्ट 14 अगस्त को आएगी। पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 20 अगस्त को घोषित होगा, जिसके बाद 21 से 27 अगस्त तक दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अभ्यर्थियों को अपग्रेडेशन का विकल्प चुनना अनिवार्य होगा।

केरल हाईकोर्ट को BDS छात्र की मौत मामले में आरोपी को बचाने की साजिश का शक, पुलिस अधिकारियों से मांगा जवाब

केरल हाईकोर्ट ने कन्नूर में बीडीएस छात्र नितिन राज की कथित आत्महत्या के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत को प्रथम दृष्टया संदेह है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरोपी डॉ. एम. के. राम को हिरासत से बचाने में शामिल हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी और क्राइम ब्रांच एसपी को 24 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है, उनसे मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा गया है। आरोपी को विशेष अदालत ने गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने पर रिहा कर दिया था।