मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकास खंड में रहस्यमय बुखार से दो माह में आठ बच्चों की मौत हो गई है, जबकि सात बच्चे अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने शुरुआत में मलेरिया की जांच की, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। राज्य मुख्यालय से आई विशेषज्ञ टीम भी बीमारी का पता लगाने में विफल रही। पूर्व मुख्यमंत्रियों कमल नाथ और दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उचित जांच और सहायता की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 93 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने गुजरात में चांदीपुरा वायरस के संक्रमण की जांच और तैयारियों को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय टीम भेजी है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि टीम राज्य के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर बीमारी को समझने, इसके फैलाव को रोकने और इलाज के तरीकों पर काम कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी गुजरात और राजस्थान में राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल भेजा है।
ग्वालियर में वर्षा के कारण जलभराव से एडीज मच्छरों के पनपने और डेंगू संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगस्त से सितंबर की अवधि सबसे संवेदनशील है, और आगामी 30-45 दिनों में मरीजों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में डेंगू की पॉजिटिविटी दर 1.9% है, जबकि पिछले साल यह 2.3% थी। अब तक 2,139 जांचों में 42 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तेज कर दी है, मलेरिया विभाग की 26 टीमें 2.31 लाख से अधिक घरों का सर्वे कर चुकी हैं, जिनमें 2,882 घरों में लार्वा मिला है। जिला मलेरिया अधिकारी ने नागरिकों से पानी जमा न होने देने और बुखार होने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।
भोपाल में जुलाई के अंत में बदलते मौसम के कारण वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ गया है। एंट्रो, एडेनो और राइनो वायरस सक्रिय होने से शहर के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में पिछले 15 दिनों में मरीजों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों को दवाओं तथा पैथोलॉजी किट का बफर स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सक मरीजों को तीन दिन से अधिक बुखार रहने या सात दिन तक बने रहने पर जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। सीएमएचओ ने निजी अस्पतालों को रैपिड कार्ड टेस्ट की पुष्टि एलाइजा जांच से कराने के निर्देश भी दिए हैं।
मध्य प्रदेश में हेपेटाइटिस बी और सी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गए हैं, जहां हर 12वां व्यक्ति संक्रमित है। हमीदिया अस्पताल के डॉ. राजेश टिक्कस के अनुसार, 95% मरीजों में शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, जिससे लिवर को काफी नुकसान होने के बाद ही बीमारी का पता चलता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, प्रदेश में 12-23 माह के 81.5% बच्चों का ही हेपेटाइटिस बी टीकाकरण पूरा हुआ है, जबकि भोपाल में 43% बच्चे वंचित हैं। भोपाल के सरकारी ब्लड बैंक में हजारों संक्रमितों की पहचान हुई है।