ग्वालियर के चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 21.05 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा हुआ है। साइबर ठगों ने यह रकम 15 से अधिक राज्यों के 20 हजार से ज्यादा म्यूल खातों में कई स्तरों पर स्थानांतरित की। पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की 35 प्रतिशत राशि दक्षिण भारत में भेजी गई। राज्य साइबर जोन पुलिस ने इस मामले में शाजापुर के जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय और मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया है। मालवीय के खाते में 2.93 करोड़ रुपए मिले, जिसमें से 50 लाख रुपए ठगी के थे। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
जबलपुर में दो लोगों को गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजना भारी पड़ा। साइबर ठगों ने डॉक्टर बनकर लिंक भेजकर उनके मोबाइल की मिररिंग कर ली और बैंक खातों से कुल 82,594 रुपये उड़ा लिए। गोरखपुर थाना क्षेत्र की सपना विश्वकर्मा ने 32,595 रुपये गंवाए, जबकि भेड़ाघाट थाना क्षेत्र के कालूराम साहू के खाते से 49,999 रुपये निकाल लिए गए। कालूराम ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, और गोरखपुर तथा भेड़ाघाट पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
भोपाल में साइबर ठगी के तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं। बागसेवनिया निवासी विष्णु शुक्ला से टेलीग्राम पर जॉब ऑफर के नाम पर 7.78 लाख रुपये की ठगी हुई, जिसमें उनके दोस्तों और परिजनों के खातों का भी उपयोग किया गया। एक अन्य मामले में, बागसेवनिया की रीना कचेर के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से फोन हैक करके 50 हजार रुपये निकाल लिए गए। इसी क्षेत्र के अनु आशीष पवार के साथ भी ऐसी ही घटना हुई, जब उनके मोबाइल अपडेट के दौरान हैकर्स ने उनके आईडीबीआई बैंक खाते से 82 हजार रुपये उड़ा लिए। पुलिस तीनों मामलों की जांच कर रही है।
भोपाल में साइबर अपराधियों ने तीन नए तरीकों से कुल 6 लाख 58 हजार 350 रुपये की ठगी की है। पहले मामले में, एक व्यक्ति ने गूगल से डॉक्टर का नंबर खोजकर कॉल किया, जिसके बाद उसे फर्जी APK फाइल भेजकर बैंक खाते से 4 लाख 35 हजार 175 रुपये निकाल लिए गए। दूसरे मामले में, मोबाइल चोरी होने के बाद यूपीआई के जरिए 37 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। तीसरे मामले में, एक युवक और उसकी मां को पार्ट-टाइम जॉब का लालच देकर 1 लाख 86 हजार 175 रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने तीनों मामलों में जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्वालियर में ग्रामीण उद्यानिकी विकास अधिकारी सुरेंद्र द्विवेदी 2.25 लाख रुपये की साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। ठगों ने एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड की अनुपयोगी सर्विस बंद करने का झांसा देकर उनसे ओटीपी पूछा और उनके खाते से रुपये निकाल लिए। 1 जुलाई को आए इस कॉल में ठग ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और पीड़ित को उनके कार्ड की सही जानकारी देकर विश्वास में लिया। इस संबंध में यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसके बाद पुलिस ने शनिवार को मूल एफआईआर दर्ज की।
इंदौर क्राइम ब्रांच ने शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित नेटवर्क के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गिरोह को फर्जी बैंक खाते और उनकी बैंकिंग किट उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम जमा करने और बांटने में होता था। पुलिस ने 15 मोबाइल फोन, पासबुक, सिम कार्ड और एक स्कार्पियो वाहन जब्त किया है। इस मामले में पहले भी दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच में पता चला है कि इन खातों का उपयोग देश के कई राज्यों में फ्रॉड के लिए किया गया था और करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं।
भोपाल में साइबर ठगी के तीन अलग-अलग मामलों में कुल 1.44 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में एक सेवानिवृत्त फायर ब्रिगेड कर्मचारी खालिद सिद्दीकी से फर्जी रिश्तेदार बनकर अस्पताल बिल के नाम पर 81 हजार रुपये ठगे गए। बजरिया थाना क्षेत्र की हर्षिता ठाकुर से फर्जी लोन ऐप के माध्यम से प्रोसेसिंग फीस के रूप में 28,900 रुपये ऐंठे गए, जबकि बैंक ने संदिग्ध लेनदेन की चेतावनी भी दी थी। एक अन्य मामले में, जहांगीराबाद के हरिशंकर गुप्ता के खाते से बिना ओटीपी या लिंक क्लिक किए 35 हजार रुपये निकाले गए। पुलिस ने तीनों मामलों में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।