मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी मामलों में बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया पर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने फैसला सुनाया कि यदि विवादित राशि स्पष्ट रूप से चिन्हित हो तो पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है। जांच एजेंसियों को केवल संदिग्ध राशि पर लियन या डेबिट फ्रीज लगाने को कहा गया है, जबकि पूरे खाते को फ्रीज करने के लिए असाधारण परिस्थितियों और कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने बैंकों को शिकायत निवारण का पहला माध्यम बताते हुए खाताधारकों को फ्रीजिंग का कारण और उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी देने का निर्देश दिया।