संसद में विपक्षी दलों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दिन में दूसरी बार दोपहर तीन बजे तक स्थगित कर दिया गया। इस दौरान एफसीआरए विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी होने से इनकार किया, जबकि कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे वापस लेने की मांग की। लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पेश किया गया और दो अन्य विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए। राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 5 अगस्त 2019 को एक अप्रत्याशित निर्णय लिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले सांविधानिक प्रावधानों अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35 ए को निष्प्रभावी कर दिया गया। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया। तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी इस पर हैरानी जताई थी। संसद में लंबी चर्चा और विरोध के बाद यह निर्णय पारित हुआ। यह सात वर्ष पुराना फैसला आज भी चर्चा का विषय है, खासकर पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने के प्रयासों और पीओके में सेना के दमन के संदर्भ में।