मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नौवीं-दसवीं कक्षाओं में संस्कृत शिक्षकों की कमी हो गई है, क्योंकि माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के तहत व्यावसायिक पाठ्यक्रम चुनने वाले छात्र हिंदी और अंग्रेजी को प्राथमिकता दे रहे हैं। संस्कृत तीसरी भाषा के तौर पर उपेक्षित हो रही है, जिससे शिक्षक खाली बैठे हैं। शासन का उद्देश्य संस्कृत को बढ़ावा देना है, जिसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान सक्रिय हुए हैं। अब संस्कृत चुनने वाले छात्रों और खाली कक्षाओं वाले स्कूलों की जानकारी मांगी गई है, ताकि बच्चों को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।