भोपाल नगर निगम रविवार से आवासीय संपत्तियों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। सैकड़ों मकान मालिकों के कंपाउंडिंग आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं क्योंकि मौजूदा प्रावधान इन गतिविधियों को नियमित करने की अनुमति नहीं देते। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हो रही है, जिसके लिए निगम ने नई एसओपी तैयार की है। निगम आयुक्त ने बैठक की और शहर में सर्वे के लिए टीमें गठित की गई हैं। रहवासियों ने नौ अगस्त को मशाल मार्च निकालने की घोषणा की है, जबकि निगम 21 जोन में सर्वेक्षण के बाद संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल में 60 से 80 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। इन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई न होने पर अदालत की अवमानना होगी, जबकि इन्हें बंद करने से लगभग 5 लाख लोगों का रोजगार संकट में आ सकता है। राज्य सरकार नए मास्टर प्लान में व्यावहारिक समाधान तलाश रही है। भोपाल का मास्टर प्लान 2005 में समाप्त हो गया था, जिससे शहर की व्यावसायिक जरूरतें अनियोजित रूप से बढ़ीं। नए प्लान में प्रमुख सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति और आवासीय क्षेत्रों का मूल स्वरूप बनाए रखने पर विचार हो रहा है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश देश में सर्वाधिक वन आवरण खोने वाला राज्य बन गया है, जिसने 2021 से 2023 के बीच 371.54 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र गंवा दिया। विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग परिवर्तन में भी राज्य पहले स्थान पर है, जहां पिछले पांच वर्षों में 24,969.87 हेक्टेयर वन भूमि का भूमि उपयोग बदला गया। यह गिरावट देश के कुल वन क्षेत्र में हुई वृद्धि के विपरीत है, जबकि कई अन्य राज्यों ने वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की है।