धार की ऐतिहासिक भोजशाला और मौलाना कमाल दरगाह परिसर से जुड़े विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। यह सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ मुस्लिम समाज की पांच याचिकाओं पर आधारित है, जिसमें भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित कर हिंदू पक्ष को नियमित पूजा की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को एक अंतरिम आदेश जारी कर मुस्लिम समाज के लिए जुमे की नमाज हेतु वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था के निर्देश दिए थे, जिसके बाद खसरा नंबर 612 की जमीन पर शांतिपूर्ण ढंग से नमाज अदा की जा रही है।
धार में भोजशाला विवाद पर मंदिर पक्ष ने मां वाग्देवी की प्रतिमा वापसी के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का उत्सव मनाया। केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार ने ब्रिटिश म्यूजियम को प्रतिमा की वापसी के लिए औपचारिक पत्र लिखा है। इसके साथ ही, महाराज भोज सेवा संस्थान समिति ने भोजशाला परिसर के संरक्षित क्षेत्र के बाहर नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को संभावित है, जिससे भविष्य की नमाज व्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए नमाज के लिए भोजशाला परिसर से सटी दरगाह की जमीन तय की है। अब हर शुक्रवार दोपहर दो घंटे तक यहां जुमे की नमाज अदा की जा सकेगी। जिला प्रशासन को आवश्यक व्यवस्थाएं करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें लगभग 350 पुलिसकर्मी शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है, जिसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नमाज के लिए निर्धारित दूसरी जगह धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से काफी दूर है। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से राज्य सरकार से यह जानकारी लेने को कहा कि क्या विवादित परिसर के पास नमाज के लिए कोई वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन द्वारा तय की गई जगह को लगभग दो किलोमीटर दूर बताया, जबकि सरकार ने इसकी दूरी 900 मीटर बताई है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए आदेश का पूरी भावना के साथ पालन करने पर जोर दिया है।
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष ने शुक्रवार की नमाज़ के लिए आवंटित स्थल की दूरी को लेकर एक अर्जी दाखिल की है, आरोप है कि प्रशासन ने अदालत के निर्देशों का उल्लंघन किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अर्जी स्वीकार कर आगामी शुक्रवार को सुनवाई की सहमति दी है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि नमाज़ स्थल भोजशाला से 2 किलोमीटर दूर है, जबकि सॉलिसिटर जनरल ने इसे 900 मीटर बताया और विवाद सुलझाने का आश्वासन दिया।