जबलपुर जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि रिश्वत की रकम बरामद होने के बावजूद, यदि रिश्वत की मांग साबित न हो, तो दोषसिद्धि नहीं हो सकती। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त किया। लोकायुक्त ने उन्हें ₹2,000 लेते हुए पकड़ा था, लेकिन बचाव पक्ष ने रिकॉर्डिंग में आवाज की प्रामाणिकता और पूर्व विवाद का तर्क दिया। न्यायालय ने पीसी एक्ट की धारा 20 और 7 की व्याख्या करते हुए मांग साबित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसके अभाव में दोषमुक्त किया गया।
टीकमगढ़ में सागर लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग के MPW देशराज घोष को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सीएमएचओ कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के एवज में 80 हजार रुपए की घूस मांग रहा था। शिकायतकर्ता अरविंद राजपूत की शिकायत पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाकर उसे पकड़ा। कार्रवाई के दौरान एक अन्य पीड़ित नरेंद्र ने भी आरोपी पर पहले 5 लाख रुपए ऐंठने का आरोप लगाया है, जिसकी जांच चल रही है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सागर के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने चार वर्ष पुराने 5 लाख रुपये रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (ईपीएफओ) सतीश कुमार को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने उन्हें पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। यह मामला जून 2022 का है, जब ईओडब्ल्यू सागर ने सतीश कुमार को उनके सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि बीड़ी निर्माता फर्म के संचालक से कुल 10 लाख रुपये की रिश्वत पीएफ अनियमितताओं पर कार्रवाई न करने के बदले मांगी गई थी।