हाईकोर्ट में उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों को बिना योजना के शुरू करने पर शासन जवाब नहीं दे सका। जनहित याचिका में बांड जारी करने की योजना को चुनौती दी गई थी, जिसके लिए आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गई हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने तीन प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार व नवनिर्माण के लिए टेंडर जारी किए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है। परियोजना के लिए न तो प्रशासनिक-वित्तीय स्वीकृतियां हैं और न ही जमीन का अधिग्रहण हुआ है। सरकार ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।
उज्जैन में 11 प्रमुख मंदिरों के विकास के लिए प्रस्तावित 200 करोड़ रुपये के ‘टेंपल बांड’ को 31 जुलाई तक लॉन्च करने का लक्ष्य था, लेकिन अगस्त शुरू होने के बाद भी ये बांड बाजार में नहीं आ सके हैं। 1124 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत में से केंद्र सरकार 281 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर कर चुकी है और 15 बैंक 600 करोड़ रुपये का ऋण देने में रुचि दिखा चुके हैं। यह देश का पहला संगठित वित्तीय प्रयोग है, जिसमें श्रद्धालुओं को दान के बजाय निवेशक के रूप में मंदिरों के विकास में भागीदार बनने का अवसर मिलेगा। प्रशासन के समक्ष अब बांड जारी करने और खरीद की तिथि घोषित करने की चुनौती है।
उज्जैन के काल भैरव मंदिर में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए मुंबई के मनीष पांचाल और समीर पांचाल ने मंदिर समिति को 10 लाख रुपये के बैरिकेड्स दान किए हैं। दानदाताओं ने नकद राशि के बजाय सीधे बैरिकेड्स तैयार करवाकर भेंट किए। बैरिकेड्स की पहली खेप रविवार को उज्जैन पहुंची और विधि-विधान से पूजन के बाद मंदिर समिति को सौंप दी गई। एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि 100 बैरिकेड्स पहुंच चुके हैं, जबकि 200 बैरिकेड्स की दूसरी खेप अगले 15 दिनों में आएगी, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु होगी।