श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि श्रावण सोमवार व्रत से पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य मिलता है। शाम 5 बजे जलाभिषेक बंद होने के बाद बाबा महाकाल राजा स्वरूप में दर्शन देते हैं। शाम 7 बजे संध्या आरती में दूध का भोग लगता है, जबकि रात 10:20 बजे शयन आरती में मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर के पट इसके बाद बंद होते हैं। एक से एक लाख बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष धार्मिक महत्व है। माता सती और पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण व्रत किए थे।
श्रावण कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या पर बुधवार सुबह उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने देर रात से ही कतार में लगकर दर्शन किए। बाबा महाकाल को हरी भांग और हरे बेल पत्र की माला से श्रृंगारित किया गया, जिससे उनका अलौकिक स्वरूप नजर आया। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती रात 3 बजे शुरू हुई, जिसमें भगवान का पंचामृत से जलाभिषेक किया गया। यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा तक जारी रहेगा।
उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 17 अगस्त, सोमवार को 24 घंटे के लिए खोले जाएंगे। इस वर्ष नागपंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़ने से एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के साथ बाबा महाकाल की दिव्य सवारी का पुण्य लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे। लाखों श्रद्धालुओं की अपेक्षित भीड़ के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं, जिनमें पार्किंग, प्रसाद वितरण, चिकित्सा सुविधाएँ और व्हीलचेयर सेवाएँ शामिल हैं।
श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नगरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के मंदिर को गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक कई क्विंटल सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। यह विशेष पुष्प शृंगार पूरी रात चला, जिसमें महेश्वर और उज्जैन के पंडितों और दक्ष कारीगरों ने सहयोग दिया। सोमवार सुबह मंदिर के पट खुलने पर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के अलौकिक और मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह 4 बजे पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने देवी-देवताओं का पूजन किया। भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला सहित आकर्षक श्रृंगार से सजाया गया। फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद कपूर आरती हुई और महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पित की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मंदिर के पिछले पांच साल के सभी दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया है। यह फैसला मनसे प्रमुख राज ठाकरे के आरोपों के बाद आया है, जिन्होंने हर साल करीब 18 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया था। इस मामले में नौ मंदिर कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
उज्जैन के तीन प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र, कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और महर्षि सांदीपनि आश्रम, सिंहस्थ-2028 से पहले 453.41 करोड़ रुपये की लागत से नए रूप में विकसित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मंदिरों के जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ श्रद्धालु अनुभव को बेहतर बनाना है, जिसमें वेटिंग एरिया, पार्किंग और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। कालभैरव में 164.50 करोड़, मंगलनाथ में 123.90 करोड़ और सांदीपनि आश्रम में 165.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे सिंहस्थ में व्यवस्थित आध्यात्मिक यात्रा सुनिश्चित की जा सके।
उज्जैन में सावन माह के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकली। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार हर सवारी में अलग-अलग थीम होंगी और कावड़ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। इस साल सावन में 4 और भादौ में 2 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें विभिन्न दल और व्यवस्थाएं शामिल होंगी।
उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद मास की पहली महाकालेश्वर सवारी सोमवार को निकाली गई। भगवान महाकाल ने चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण किया, जिसमें 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह सवारी ‘वैदिक उद्घोष’ थीम पर आधारित थी, जिसे कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने दोपहर 3:30 बजे रवाना किया। 5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर झांझ-डमरू, भजन मंडलियों और पुष्पवर्षा से उत्सव का माहौल रहा। सुरक्षा के लिए 1200 से अधिक पुलिसकर्मी, 500 से अधिक वालंटियर्स और 5 ड्रोन तैनात किए गए थे। यातायात को सुचारु रखने हेतु विशेष डायवर्जन और पार्किंग प्लान लागू किया गया था।
शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र के लेदरा गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर से शिवलिंग चोरी हो गया है। सुबह पूजा के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने शिवलिंग गायब देखा, जिससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने मंदिर के पास स्थित तालाब में गोताखोरों की मदद से शिवलिंग की तलाश कराई। लेदरा निवासी कृष्णकांत शुक्ला की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि विभिन्न पहलुओं पर जांच जारी है और पुलिस को जल्द खुलासे की उम्मीद है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक कोई सुराग नहीं मिला।