BREAKING NEWS

Latest News

मणिपुर के काकचिंग में NRC-जनगणना विरोध मार्च हिंसक, पुलिस पर पथराव के बाद आंसू गैस के गोले छोड़े

मणिपुर के काकचिंग जिले में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर निकाला गया मशाल जुलूस हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस झड़प में कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। सैकड़ों ग्रामीणों ने ‘नो NRC, नो Census’ के नारे लगाए, जिसमें जनगणना से पहले NRC अपडेट और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग की गई।

कांगपोकपी जिले के नगा गांव पर हथियारबंद बदमाशों का हमला, कई घरों में लगाई आग

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार रात हथियारबंद बदमाशों ने टोकपा लियांगमई नगा गांव पर हमला किया। अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने गांव में कई राउंड गोलियां चलाईं और फिर कई घरों में आग लगा दी। यह घटना तुमनौपोकपी थांगल गांव के पास रात करीब 10 बजे हुई। आगजनी में जले घरों की सही संख्या का पता लगाया जा रहा है, हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक अधिकांश घर कच्चे थे। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।

मणिपुर में टैंकरों से जबरन वसूली: सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस को घेरा, राज्य सरकार ने एसओपी समीक्षा का लिया फैसला

मणिपुर में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी टैंकरों से जबरन वसूली का मामला सामने आया है, जहां सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस पर वसूली के आरोप लगाए हैं। यह मुद्दा मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह तक पहुंचने के बाद राज्य सरकार ने एनएच-37 पर जबरन वसूली रोकने के लिए मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा और संशोधन का निर्णय लिया है। एक समन्वय समिति का गठन किया गया है, जिसमें सीआरपीएफ और राज्य सरकार की एजेंसियां शामिल हैं, जो तीस दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। पेट्रोलियम संघों ने भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या पर प्रकाश डाला था।

ऋषिकांत सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीता

ऋषिकांत सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 264 किलो वजन उठाकर रजत पदक जीता। यह पदक उनके परिवार के 15-16 साल के अथक संघर्ष का परिणाम है। उनकी मां और बहनों ने खेतों में मजदूरी की, बड़े भाई अमरजीत सिंह ने दोस्तों से कर्ज लेकर डाइट व प्रतियोगिताओं का खर्च उठाया। पिता को ब्लड कैंसर होने के बावजूद परिवार ने ऋषिकांत की तैयारी प्रभावित न हो, इसके लिए इलाज के लिए उनसे पैसे नहीं लिए। ऋषिकांत ने अपनी बहनों की शादियां भी महत्वपूर्ण मुकाबलों के कारण छोड़ दीं। परिवार ने अपने सपनों का त्याग कर ऋषिकांत के खेल करियर को आगे बढ़ाया।