मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बहू और बेटे को कथित अवैध बंधन से मुक्त कराने वाली हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे पारिवारिक विवाद माना और कहा कि तथ्यों को छिपाया गया है। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के बेटे नीरज की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए, जिसे पहले 75 प्रतिशत मानसिक दिव्यांग बताया गया था। कोर्ट ने पूछा कि यदि वह अस्वस्थ था तो उसकी शादी क्यों कराई गई और वह पिता कैसे बना। नीरज को न्यायालय में बुलाने पर उसका व्यवहार सामान्य प्रतीत हुआ।